अयोध्या मेडिकल कॉलेज छात्र मौत मामला: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘हार्ट अटैक’ पर उठ रहे गंभीर सवाल, 5 घंटे की वो ‘मिस्ट्री’ जिसने सबको उलझाया

—मौत के पांच घंटे पहले तक कहां था मेडिकल कालेज का छात्र?
— दो बजे रात जब अस्पताल से गायब हुआ तो पुलिस को क्यों नहीं दी गई सूचना ?
— चिकित्सक व स्टाफ की गलतियों पर पर्दा डाल रहे प्राचार्य

अयोध्या। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भले ही राजर्षि मेडिकल कालेज के छात्र की मौत को हार्ट अटैक से होना बता दिया गया है। परिवारीजनो ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के दबाव में होंट बंद कर लिए हैं। किन्तु मेडिकल कालेज में हुई छात्र की मौत अपने पीछे कई बड़े सवाल छोड़ गई है,जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी रहस्य बनी है।

राजर्षि दशरथ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय दर्शन नगर अयोध्या डिप्लोमा इन ब्लड ट्रांसफ्यूजन द्वितीय वर्ष के छात्र जितेंद्र प्रताप की संदिग्ध मौत को पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हार्ट अटैक बताकर रफा-दफा कर दिया है, फिर भी जितेंद्र की मौत के मामले में मेडिकल कालेज के स्टाफ और चिकित्सक की घोर लापरवाही सामने आई है।

जितेंद्र को 13 मार्च 2026 को सायंकाल साढ़े पांच बजे लगभग मेडिकल कालेज में पेट दर्द की शिकायत होने पर भर्ती कराया गया था। वह रात्रि में लगभग दो बजे संदिग्ध परिस्थितियों में मेडिकल कालेज से लापता हो गया। 14 मार्च 2026 को प्रातः सात बजे उसे दोबारा कहीं से कोई साथी मेडिकल कालेज लाया। जहां चिकित्सक डा. अरविंद कुमार जो जितेंद्र का उपचार कर रहे थे, ने उसे मृत घोषित करते हुए बताया कि जितेन्द्र लाते समय ही रास्ते में ही मर गया था। चिकित्सक ने मैमो में ब्राडडैड लिखकर साढ़े आठ बजे पुलिस को मैमो के जरिए सूचना भेज दी।

छात्र जितेंद्र की मौत को लेकर जो बड़ा सवाल उठ रहा है, वह यह कि रात दो बजे से प्रातः सात बजे तक जितेंद्र मेडिकल कालेज के बेड पर नहीं था,तो कहां था? किन संदिग्ध परिस्थितियों में वह लापता हो गया। पूरे पांच घंटे जितेंद्र कहां रहा। क्या वह स्वयं कहीं चला गया था या फिर उसे गायब कर दिया गया था ? सबसे बड़ा सवाल यह कि जब कोई मरीज बिना बताए अस्पताल से चला जाता है,तो उसे लामा घोषित करते हुए पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है। लेकिन मेडिकल कालेज में न तो चिकित्सक ने और न ही वार्ड में मौजूद किसी स्टाफ ने जितेंद्र के मेडिकल कालेज से फरार होने , गुम या लापता होने की कोई इन्फार्मेशन पुलिस को दी। जब कि पुलिस को सूचना देना आवश्यक है। पुलिस को सूचना न देना जितेंद्र की मौत के पीछे किसी साज़िश का हिस्सा हो सकती है,जो पुलिस की जांच का विषय है। फिर भी पांच घंटे मरीज बेड से गायब रहा और पुलिस को कोई सूचना न देने के मामले ने जितेंद्र की मौत की मिस्ट्री को शक के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

— अपने चिकित्सक व स्टाफ का बचाव करते दिखे प्राचार्य
मेडिकल कालेज के छात्र जितेंद्र की मौत के मामले में चिकित्सक व स्टाफ की गलतियों पर प्राचार्य डा. दिनेश सिंह मार्तोलिया पर्दा डालते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि रात में उसने यह बताया था कि मुझे आराम मिल गया है। यह कह कर वह घर चला गया था। प्राचार्य से जब यह पूछा गया कि जब कोई मरीज बिना बताए चला जाता है तो स्टाफ मैमो बनाकर उसे ” लामा” लिखकर पुलिस को सूचना भेजते हैं। यदि वह बताकर अस्पताल से जाता है तो बीएचटी (मरीज की भर्ती फाइल) में उससे स्वेच्छा से जाने की बात दर्शाया जाता है, जो नहीं किया गया है। प्राचार्य डा. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने बताया कि मैं मौजूद नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की ग़लती हुई है तो यह गंभीर विषय है। फिलहाल इसकी हम अपने स्तर से जांच करेंगे।

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