बांग्लादेश चुनाव परिणाम 2026:  तारिक रहमान का PM बनना तय…शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग क्यों हुई तेज?

 

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। 12 फरवरी 2026 को हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनावों के नतीजों ने देश की दिशा बदल दी है। निर्वासन में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इन चुनावों को ‘धोखे और दिखावे का खेल’ करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है, जिससे तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।

शेख हसीना का तीखा प्रहार: ‘आंकड़ों का खेल है यह चुनाव’

अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद से भारत में शरण लिए हुए शेख हसीना ने चुनाव परिणामों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मतदान के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने कम समय में भारी मतदान दिखाना पूरी तरह से अवास्तविक और प्रशासनिक हेरफेर है। हसीना का कहना है कि उनकी पार्टी ‘अवामी लीग’ को चुनाव से बाहर रखकर जनता की असली राय को दबाया गया है। उन्होंने इसे बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का ‘कलंकित अध्याय’ बताया है।

तारीक रहमान की वापसी और प्रत्यर्पण की मांग

चुनावों में मिली भारी जीत के बाद अब BNP के सुर बेहद सख्त हो गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भारत सरकार से शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग तेज कर दी है।

  • मौत की सजा: बता दें कि नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में ‘मौत की सजा’ सुनाई थी।
  • कानूनी प्रक्रिया: BNP नेता सलाहुद्दीन अहमद ने स्पष्ट किया है कि नई सरकार कानूनी रास्ते अपनाकर हसीना को वापस बांग्लादेश लाएगी ताकि वे मुकदमों का सामना कर सकें।

सत्ता के नए समीकरण: क्या होगा मुहम्मद यूनुस का?

बांग्लादेश में 18 महीने तक अंतरिम सरकार की कमान संभालने वाले नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस अब सत्ता से विदा हो रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का मानना है कि तारिक रहमान की नई सरकार में उन्हें आर्थिक सलाहकार या किसी विशेष भूमिका में रखा जा सकता है। यूनुस के नेतृत्व में ही ‘जुलाई चार्टर’ जनमत संग्रह कराया गया था, जिसे जनता ने बहुमत से स्वीकार किया है।

भारत के सामने ‘दोस्त’ और ‘पड़ोसी’ की दुविधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को चुनावी जीत पर बधाई तो दी है, लेकिन नई दिल्ली के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं:

  1. पुराना गठबंधन: शेख हसीना भारत की लंबे समय से सहयोगी रही हैं। उन्हें वापस भेजना कूटनीतिक रूप से एक कठिन फैसला होगा।
  2. नए रिश्ते: यदि भारत हसीना को नहीं भेजता है, तो BNP सरकार के साथ संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं, जिससे सीमा सुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों पर असर पड़ेगा।
  3. बराबरी का रिश्ता: BNP ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वह भारत के साथ ‘बराबरी के आधार’ पर बात करेगी, जिसमें तीस्ता जल बंटवारे और सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे प्रमुख होंगे।

बांग्लादेश में हुआ यह सत्ता परिवर्तन दक्षिण एशिया की पूरी जियो-पॉलिटिक्स को बदलने की ताकत रखता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार भारत के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है। 

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