
भास्कर ब्यूरो
बरेली। जिले के बहेड़ी क्षेत्र में विजिलेंस टीम ने बिजली चोरी पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया, लेकिन इस दौरान उन पर ही हमला हो गया। मुड़िया नबीबख्श गांव में जब टीम कटिया डालकर चलाई जा रही आटा चक्की की वीडियोग्राफी कर रही थी, तभी आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया।
इस मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह सवाल उठाता है कि आखिर पुलिस इस मामले में इतनी ढिलाई क्यों बरत रही है? तीन मार्च को बिजली विभाग की विजिलेंस टीम ने बहेड़ी थाना क्षेत्र के मुड़िया नबीबख्श गांव में छापा मारा।
इस दौरान उन्होंने पाया कि एक आटा चक्की अवैध रूप से कटिया डालकर चलाई जा रही थी। जब टीम ने इसका वीडियो बनाना शुरू किया, तो वहां मौजूद लोगों ने उन पर हमला कर दिया। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, आरोपियों ने विजिलेंस टीम के अधिकारियों को घर के अंदर खींचकर बंधक बना लिया, उनकी वर्दी फाड़ दी और मारपीट की।
यह हमला अचानक हुआ, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी। विजिलेंस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह और उनकी टीम ने जैसे-तैसे अपनी जान बचाई और घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला दर्ज होने के बावजूद, अभी तक पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है, जो कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
घटना के बाद उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह की तहरीर पर कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इनमें प्रमुख रूप से मुज्जमिल उर्फ मोनू, मुदस्सिर उर्फ सोनू, हनीफ, लईक अहमद, यूसुफ, शफीक अहमद उर्फ घंठा, इम्तियाज, अशरफ, अनीस अहमद और श्रीमती बेबी शामिल हैं। इनके अलावा, 10-20 अज्ञात महिला और पुरुष भी इस हमले में शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, जिनमें सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और लूटपाट जैसी धाराएं शामिल हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब मामला इतना गंभीर है और नामजद आरोपी भी सामने आ चुके हैं, तो पुलिस अभी तक उन्हें पकड़ने में नाकाम क्यों रही है? क्या प्रशासन जानबूझकर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहता है?7 मार्च को विजिलेंस टीम ने दोबारा उसी गांव में जाकर चेकिंग की। इस बार उन्हें फिर से वही आटा चक्की अवैध रूप से कटिया डालकर चलती मिली। टीम ने इसे फिर से रिकॉर्ड किया, लेकिन इस बार भी उन पर हमला हुआ। मुख्य आरक्षी सोनू कुमार और एसआई धर्मेंद्र सिंह पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, उनके मोबाइल छीनने की कोशिश की गई और टीम के सदस्यों को बंधक बनाने की कोशिश की गई।
इस घटना के बाद भी पुलिस सिर्फ मुकदमा दर्ज करने तक सीमित रही। गिरफ्तारी की कार्रवाई न होने से आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। अगर पुलिस इसी तरह सुस्त बनी रही, तो विजिलेंस टीम के अधिकारी और कर्मचारी लगातार खतरे में रहेंगे।बिजली चोरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब सरकार की टीम इसे रोकने के लिए कार्रवाई करती है और बदले में उन पर ही हमला होता है, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अगर पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करती, तो इसका सीधा मतलब यही निकाला जाएगा कि कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन की मिलीभगत हो सकती है।
इसके अलावा, यह सवाल भी उठता है कि क्या बहेड़ी क्षेत्र में बिजली माफिया इतने शक्तिशाली हो चुके हैं कि वे सरकार की टीम पर हमला करने से भी नहीं डरते? अगर विजिलेंस टीम की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तो आगे चलकर अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बन सकता है।
विजिलेंस टीम का काम बिजली चोरी को रोकना है, और उन्होंने पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाया। लेकिन उनके साथ हुई इस बर्बरता के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता चिंता का विषय है।
सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराए। अगर प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं हुआ, तो विजिलेंस अधिकारियों का मनोबल गिर सकता है और भविष्य में कोई भी सरकारी टीम बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरेगी। इसके अलावा, ऐसे अपराधियों को खुला छोड़ना आम जनता के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है।