बड़ी खबर : गगनयान’ क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग 5 सेकेंड पहले टली, इन पॉइंट्स में जानिए पूरा अपडेट

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने शनिवार 21 अक्टूबर को गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल की लॉन्चिंग 5 सेकेंड पहले रोक दी। इंजन फायर नहीं होने के कारण ऐसा हुआ। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे 8 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन मौसम ठीक नहीं होने कारण इसका टाइम बदलकर 8.45 किया गया था।

इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ ने बताया कि ऑटोमेटिक लॉन्च सिक्वेंस के जरिए लिफ्ट ऑफ होना था, लेकिन इंजन समय पर चालू नहीं हो पाए। हमे देखना होगा क्या गड़बड़ी हुई। व्हीकल पूरी तरह से सेफ है। हमें व्हीकल के पास जाकर चेक करना होगा। एनालाइज करने के बाद हम इसका कारण बताएंगे। लॉन्च कब होगा इसकी जानकारी भी एनालिसिस के आधार पर देंगे।

इस मिशन को टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 (TV-D1) नाम दिया गया है। आसान भाषा में कहे तो मिशन के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी होने पर अंदर मौजूद एस्ट्रोनॉट को पृथ्वी पर सुरक्षित लाने वाले सिस्टम की टेस्टिंग होनी थी। ये मिशन 8.8 मिनट मिनट का था। इसमें तीन हिस्से हैं- सिंगल स्टेज लिक्विड रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम।

गगनयान मिशन को 10 पॉइंट्स में समझिए
#1. इसरो अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है। गगनयान के तहत कुल तीन उड़ानें भरी जानी है।

#2. पहली दो उड़ान में कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं जाएगा। तीसरी उड़ान में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाना है।

#3. 21 अक्टूबर को TV-D1 टेस्ट फ्लाइट के बाद गगनयान कार्यक्रम के तहत तीन और परीक्षण D2, D3 और D4 की प्लानिंग की है।

#4. क्रू मॉड्यूल, जिसमें तीनों अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे, 3.7 मीटर व्यास और सात मीटर ऊंचाई का बना होगा।

#5. इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर के अनुसार, यह मिशन इसरो को प्लॉन्चिंग और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में उच्च स्तर की विश्वसनीयता हासिल करने में सक्षम करेगा। इससे 15,000 लोगों को रोजगार देने में मदद मिलेगी और उनमें से 861 इसरो से होंगे।

#6. मानव अंतरिक्ष उड़ान को कक्षा तक पहुंचने में 16 मिनट लगेंगे जहां वह पांच से सात दिनों तक रहेगा।

#7. अंतरिक्ष यान को 300-400 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

#8. एक ऑक्सीजन सिलेंडर रखने की क्षमता के साथ स्पेस सूट अंतरिक्ष यात्री को 60 मिनट तक अंतरिक्ष में सांस लेने की अनुमति देगा।

#9. यह कैप्सूल हर 90 मिनट में पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाएगा और अंतरिक्ष यात्री सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकेंगे। तीनों अंतरिक्ष यात्री सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण पर प्रयोग करते हुए हर 24 घंटे में अंतरिक्ष से भारत को देख सकेंगे।

#10. वापसी में कैप्सूल को 36 घंटे लगेंगे और यह गुजरात के तट से कुछ दूर अरब सागर में उतरेगा।

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