
काराकस । अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक घमासान के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति में देश की संप्रभुता की रक्षा और प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह निर्णय अनिवार्य है।
56 वर्षीय डेल्सी रोड्रिग्ज वेनेजुएला की राजनीति का एक अत्यंत कद्दावर और अनुभवी चेहरा रही हैं। एक क्रांतिकारी पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली डेल्सी के पिता, जॉर्ज एंटोनियो रोड्रिग्ज, एक प्रसिद्ध वामपंथी नेता थे। कानून की विशेषज्ञ डेल्सी पिछले एक दशक में मादुरो प्रशासन की सबसे भरोसेमंद और सशक्त सहयोगी बनकर उभरी हैं। उनकी निष्ठा और आक्रामक कार्यशैली के कारण ही मादुरो उन्हें अक्सर शेरनी कहकर संबोधित करते थे। रोड्रिग्ज का राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है, जिसमें उन्होंने 2013 से 2017 के बीच सूचना और विदेश मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। जून 2018 में उन्हें देश का उपराष्ट्रपति नियुक्त किया गया और अगस्त 2024 में तेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किए जाने के बाद डेल्सी रोड्रिग्ज ने सख्त और अडिग तेवर दिखाए हैं। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक ऑडियो संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए निकोलस मादुरो ही देश के एकमात्र वैध राष्ट्रपति हैं। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को चुनौती देते हुए मादुरो के सुरक्षित होने के सबूत मांगे और अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। रोड्रिग्ज का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के ठीक विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि रोड्रिग्ज वाशिंगटन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं और उन्होंने विधिवत शपथ ले ली है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला का शासन चलाने की योजना बना रहा है, लेकिन रोड्रिग्ज ने इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। राजधानी काराकस से आ रही नवीनतम तस्वीरों ने उन तमाम अफवाहों पर भी विराम लगा दिया है जिनमें उनके रूस पलायन की बात कही जा रही थी। फिलहाल वे देश के भीतर ही मौजूद रहकर सरकारी तंत्र का नेतृत्व कर रही हैं। इस समय वेनेजुएला एक गंभीर दोराहे पर खड़ा है, जहाँ एक तरफ अंतरराष्ट्रीय दबाव है और दूसरी तरफ देश के भीतर सत्ता को बचाने का संघर्ष जारी है।














