
बांदा/चित्रकूट: बुंदेलखंड के चित्रकूट और बांदा जिलों को झकझोर देने वाले देश के सबसे बड़े ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ रैकेट में पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 50 से अधिक मासूम बच्चों के यौन शोषण और उनके वीडियो डार्क वेब पर बेचने के जुर्म में सजा-ए-मौत (फांसी) सुनाई गई है। 18 फरवरी 2026 को दोषी करार दिए जाने के बाद, जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस कृत्य को ‘मानवता पर कलंक’ बताते हुए दोनों को मृत्युदंड से दंडित किया।
इंटरपोल के एक डिजिटल अलर्ट से खुला ‘पाप का साम्राज्य’
इस खौफनाक दास्तां की शुरुआत अक्टूबर 2020 में हुई, जब इंटरपोल (Interpol) ने भारतीय जांच एजेंसियों को एक डिजिटल अलर्ट भेजा। अलर्ट में बताया गया कि भारत के किसी सुदूर इलाके से बड़े पैमाने पर बाल यौन शोषण का कंटेंट (CSAM) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपलोड किया जा रहा है। सीबीआई (CBI) ने जब इस तकनीकी संकेत का पीछा किया, तो तार चित्रकूट के सिंचाई विभाग में तैनात इंजीनियर रामभवन से जुड़े। 31 अक्टूबर 2020 को एफआईआर दर्ज हुई और 17 नवंबर को रामभवन की गिरफ्तारी के साथ इस ‘डेविल कपल’ का चेहरा बेनकाब हो गया।
गिफ्ट और लालच का जाल: 5 से 16 साल के बच्चे थे निशाने पर
जांच में सामने आया कि यह दंपति बेहद शातिर तरीके से शिकार चुनता था। वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 5 से 16 साल तक के बच्चों को खिलौनों, चॉकलेट और पैसों का लालच देकर अपने घर बुलाते थे। मासूमों को क्या पता था कि जिस हाथ से वे तोहफे ले रहे हैं, वही हाथ उनकी जिंदगी नर्क बनाने वाले हैं। रामभवन बच्चों का यौन शोषण करता था और उसकी पत्नी दुर्गावती न केवल इसमें सहयोग करती थी, बल्कि साक्ष्यों को छिपाने और गवाहों को धमकाने में भी शामिल थी।
डार्क वेब के जरिए 47 देशों में फैला था कारोबार
सीबीआई की छापेमारी में आरोपी के घर से जो मिला, उसने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। बरामद पेन ड्राइव में 34 खौफनाक वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि यह दंपति इन वीडियो को ‘डार्क वेब’ के जरिए चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचता था। घर से 8 मोबाइल, लैपटॉप, वेबकैम, सेक्स टॉय और 8 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जो इस घिनौने व्यापार की कमाई थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘समाज की नींव पर प्रहार’
मुकदमे के दौरान 74 गवाहों की गवाही हुई। 700 पन्नों की चार्जशीट में दर्ज सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने माना कि यह कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था। जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में कड़ा संदेश जाना जरूरी है। कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा के साथ-साथ प्रत्येक चिन्हित पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।









