
नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन के बाद अब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस तनाव का सीधा असर अब देश के अन्नदाताओं की जेब पर पड़ने वाला है। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि आने वाले दिनों में कीटनाशकों (Pesticides) की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की शुरुआत होने वाली है और किसानों को फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशकों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
पेट्रोकेमिकल्स और कच्चे माल के दाम में लगी आग
युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। चूंकि कीटनाशक बनाने में पेट्रोकेमिकल उत्पादों और सल्फर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, इसलिए उत्पादन लागत बढ़ना तय है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोकेमिकल्स के दाम पहले ही 30 फीसदी तक चढ़ चुके हैं, वहीं पैकेजिंग की लागत में भी 15 से 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एग्रोकेमिकल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल महीने से बाजार में नए स्टॉक महंगे दामों पर ही उपलब्ध होंगे।
चीन की चाल और ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट
भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग काफी हद तक कच्चे माल (Technical Grade Chemicals) के लिए चीन पर निर्भर है। संकट का फायदा उठाते हुए चीन ने न सिर्फ रसायनों की कीमतें बढ़ा दी हैं, बल्कि निर्यात में भी कटौती कर दी है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। जानकारों का मानना है कि चीन में चल रही अंतरराष्ट्रीय बैठकों के बाद ही स्थिति कुछ स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन फिलहाल राहत के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
रुपया कमजोर और शिपिंग चार्ज में बेतहाशा वृद्धि
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के 93 के पार पहुंच जाने से आयात करना और भी महंगा हो गया है। इसके अलावा, युद्ध प्रभावित समुद्री रास्तों के कारण शिपिंग चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। कंपनियों का कहना है कि लागत का बोझ इतना बढ़ गया है कि अब कीमतों में इजाफा करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में कीटनाशकों की किल्लत भी पैदा हो सकती है।
वैश्विक निर्यात पर भी संकट के बादल
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक देश है, जो सालाना करीब 5.5 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार करता है। घरेलू बाजार के साथ-साथ अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इस संकट का असर दिखना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते स्थितियां नहीं सुधरीं, तो भारत के कृषि निर्यात लक्ष्य को बड़ा झटका लग सकता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।














