तुर्की में भ्रष्टाचार जांच से हिली सरकार…प्रधानमंत्री इरदुगान पर साजिश के आरोप

अंकारा । तुर्की में एक बड़े भ्रष्टाचार जांच अभियान ने प्रधानमंत्री रजब तैयब इरदुगान की सरकार को झकझोर कर रख दिया है।

हुर्रियत डेली न्यूज के अनुसार, अभियोजक कार्यालय ने तीन स्तरों पर जांच शुरू की है। पहले चरण में निर्माण क्षेत्र के बड़े उद्योगपतियों पर पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों और सलाहकारों को रिश्वत देकर अवैध निर्माण परमिट हासिल करने का आरोप लगाया गया है। दूसरे चरण में फातिह नगर पालिका के अधिकारियों पर कथित रूप से गिरोह के सदस्यों को गैरकानूनी निर्माण अनुमति देने की जांच हो रही है। तीसरे चरण में अज़रबैजानी कारोबारी रेज़ा ज़र्राब के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।

रेज़ा ज़र्राब पर आरोप है कि उसने तुर्की, ईरान और रूस के बीच करोड़ों डॉलर के अवैध लेन-देन के लिए गृह मंत्री के बेटे, इकॉनमी मंत्री के बेटे और सरकारी बैंक हाल्कबैंक के एक वरिष्ठ प्रबंधक को रिश्वत दी। साथ ही उस पर अपने रिश्तेदारों और गिरोह के सदस्यों के लिए अवैध रूप से तुर्की की नागरिकता दिलवाने का भी आरोप है।

हालांकि, कुछ सांसदों का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि एर्दोआन सरकार को कमजोर करने की साजिश है। सत्तारूढ़ दल समर्थक अखबारों ने अमेरिका में निर्वासन में रह रहे मुस्लिम धर्मगुरु फेतुल्लाह गुलन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पुलिस और न्यायपालिका में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एर्दोआन की एके पार्टी के खिलाफ अभियान चलाया।

प्रधानमंत्री रजब तैयब इरदुगान ने प्रतिक्रिया में कहा कि “तुर्की कोई केला गणराज्य नहीं है” और वह किसी भी धमकी या “गंदी साजिश” के आगे नहीं झुकेंगे। इस जांच के चलते अब तक दर्जनों पुलिस अधिकारी और संगठित अपराध इकाइयों के प्रमुखों को उनके पदों से हटाया जा चुका है।
रजब तैयब इरदुगान 2014 से तुर्की के राष्ट्रपति हैं। वह पहले 2003 से 2014 तक तुर्की के प्रधानमंत्री और 1994 से 1998 तक इस्तांबुल के मेयर के पद पर रह चुके हैं. उन्होंने 2001 में जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एके पार्टी) की स्थापना भी की।

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