सीतापुर में ब्लिस इंटरनेशनल स्कूल का हुआ भव्य शुभारम्भ

बेहतर शिक्षा प्रणाली ही हमारे समाज के उत्थान में सहायक-महामंडलेश्वर अभयानंद सरस्वती

मातृवान, पितृवान तथा आचार्यवान होना ही अच्छी शिक्षा की निशानी है

महोलीसीतापुर। बेहतर शिक्षा प्रणाली ही हमारे समाज के उत्थान में सहायक होती है जिसके लिये शिक्षा के साथ साथ संस्कार, सामाजिकता तथा आचार विचार का समावेश होना परम आवश्यक है। यह बात स्कूल मे आये हुये मुख्य अतिथि अनन्त विभूषित श्री महामण्डलेश्वर अभयानन्द सरस्वती महाराज ने नगर मे नवनिर्मित ब्लिस इंटरनेशनल स्कूल के शुभारम्भ मे मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्जन व माल्यार्पण करते हुये कही। उन्होंने कहा कि आज के समय मे शिक्षा और संस्कृति का ध्यान रखते हुए आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने की आवश्यकता है, नये शिक्षार्थी कोमल वृक्ष की तरह होते हैं उन्हे इस समय बेहतरीन शिक्षा रूपी सहारा देकर उनके भविष्य को मंजिल की ओर ले जाने मे सहायक होता है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय के संगीत शिक्षक दीपक बाजपेयी और उनकी टीम द्वारा माँ सरस्वती की वंदना गाकर किया गया और उसके पश्चात विद्यालय कमेटी के सदस्यों द्वारा राष्ट्रगान कर कार्यक्रम का समापन किया गया। मंच संचालन विद्यालय कमेटी की कोआर्डिनेटर मनीषा अवस्थी के द्वारा किया गया। स्कूल के प्रबंधक अवधेश वर्मा ने आये हुए आगंतुकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमारा मकसद शिक्षा का व्यापार करना नही अपितु अपने क्षेत्र के बच्चों मे उच्च शिक्षा तथा बेहतरीन संस्कार प्रदान करने का है जिसके लिये उन्होंने इस स्कूल की स्थापना की है। स्कूल की प्रबंध निदेशिका डा० रेनू वर्मा ने आगंतुकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमारे विद्यालय मे उच्च शिक्षा के लिये केरल, आंध्रप्रदेश से आये हुये शिक्षक और शिक्षिकाओं द्वारा शिक्षण कार्य किया जायेगा। जिन बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए सीतापुर या लखनऊ जाना पड़ता था उनको वही शिक्षा यहां उपलब्ध कराई जायेगी जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ नही पड़ेगा। इस दौरान ब्लिस इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य सुमित कुमार अवस्थी, अरजित वर्मा, मोनिका सिंह, आयुष वर्मा, डा० रामजी दास टण्डन, डा० सतीश वर्मा, महेश अग्रवाल, अनिल वर्मा, ब्रजेश त्रिवेदी लालू सभासद, राजकुमार तिवारी, अधिशाषी अधिकारी दयाशंकर वर्मा, कौशलेन्द्र दीक्षित राजू, विश्ववीर सिंह, मनोज मिश्रा समेत तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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