बिल्हौर हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला : खुद की बेटी की पीट-पीटकर हत्या करने वाले माता-पिता को उम्रभर जेल

बिल्हौर, कानपुर नगर।ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत थाना अरौल पुलिस ने इंसानियत को झकझोर देने वाले एक जघन्य हत्याकांड में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अपनी ही 10 वर्षीय मासूम बेटी की बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने और शव को लकड़ी के ढेर में छिपाने वाले माता-पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास तथा 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला मासूम को सच्ची श्रद्धांजलि और समाज के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।घटना 3 फरवरी 2024 की है। ग्राम गजना, थाना अरौल निवासी अनीश मुहम्मद उर्फ लालू और उसकी पत्नी फरजाना खातून ने घरेलू विवाद के दौरान अपनी बेटी रिहाना को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद दोनों ने अपराध छिपाने के लिए बच्ची के शव को घर के पास लकड़ी के ढेर में दबा दिया।अगले दिन 4 फरवरी 2024 को मामले की जानकारी मिलने पर थाना अरौल में अभियुक्तों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तेजी से विवेचना पूरी कर 9 मार्च 2024 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।इस जघन्य अपराध को पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत विशेष रूप से चिन्हित किया गया। अभियोजन की सशक्त पैरवी और पुलिस की पुख्ता विवेचना का ही परिणाम रहा कि करीब दो वर्ष की सुनवाई के बाद गुरुवार को एडीजे-06/गैंगेस्टर एक्ट कोर्ट, कानपुर देहात के न्यायाधीश दुर्गेश पाण्डेय ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।मामले में शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी, विवेचक निरीक्षक जनार्दन सिंह यादव और पैरोकार कांस्टेबल सुधीर की प्रभावी भूमिका रही। थाना अरौल पुलिस की इस सफलता को विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।यह फैसला न केवल मासूम रिहाना को इंसाफ दिलाने वाला है, बल्कि समाज को यह सख्त संदेश भी देता है कि रिश्तों की आड़ में किए गए जघन्य अपराध किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे।

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