बहराइच में स्थानीय मुद्दों से मुँह छुपाते प्रत्याशियो की डगमगा रही नैय्या

सपा और भाजपा की हो सकती है सीधी टक्कर

मुस्लिम वोटरों को रास नही आ रही “हाथी” की सवारी “पतंग” का नही चल रहा जादू

भास्कर ब्यूरो
जरवल/बहराइच। 27 फरवरी को पाँचवे चरण का कैसरगंज की विधान सभा मे होने वाले मतदान मे भाजपा समेत सपा बसपा व ए आइ एम आइ एम ने वोटरों को रिझाने के लिए भले ही स्टार प्रचारकों की जनसभाएं करवा चुके हैं पर वोटरों का रुझान सीधे सपा की साइकिल व भाजपा के कमल पर ध्यान केंद्रित होता नजर तो आ रहा है।पर प्रत्याशियो द्वारा स्थानीय मुद्दों से मुँह चुराना भी नुकसान का संकेत दे रहा है। जिसकी कसर इस बार इस विधान सभा का मतदाता 27 फरवरी को पाँचवे चरण के होने वाले मतदान के दौरान ईवीएम मशीन के बटन को दबा कर अपने गुस्से का इजहार प्रकट करने के लिए समय का इंतजार करते दिख रहा है।

वैसे जानकारों की माने तो यहाँ के होने वाले चुनाव मे भाजपा “राम” के नाम पर तो सपा की ओर मुस्लिम वोटरों के रहनुमा अखिलेश यादव के नाम का ही माला जप रहा है  गया। परिणाम मे कौन बाजी मारेगा फिलहाल भविष्य के गर्भ मे है। वैसे इस विधान सभा के तमाम मुस्लिम वोटरों की जब राय “दैनिक भास्कर”ने जानने की कोशिश की तो वोटरों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भइया  भाजपा को बसपा व एआईएमआई एम हरा नही सकती सपा ही उन्हे मात दे सकती है तो वोट बर्बाद क्यो करे। तमाम मुस्लिम वोटरों ने यह भी कहा बसपा बुरी नही है ओवैसी की पार्टी भी बुरी नही है पर भाजपा को परास्त करने की ताकत न होने से सपा की ओर मुड़ना मजबूरी भी तो है। दूसरी तरफ जब हिन्दू वोटरों से बात की तो भाजपा से नही यहाँ भाजपा प्रत्याशी से नाराजगी जरूर है पर मोदी व योगी के नाम पर हम लोग भाजपा के साथ है कहा हम लोग देवदुर्लभ जो है जबकि तमाम भाजपाइयों ने यह भी तर्क दिया कि बीते पाँच वर्ष गुजर गए अपनो का कोई काम नही करा सके अब किस मुँह से भाजपा के लिए वोट माँगे लेकिन भइया नाम न छापना अपनी पीड़ा कहे तो किससे ये भी कहा कि 27 फरवरी को मतदान मे हिसाब भी चुकता कर लेगे। वैसे जब ये संवाददाता तमाम जागरूक मतदाताओ से चुनावी चर्चा की तो लोगो ने बताया कि धर्म जाति पर हो रहा वोटो का खेल प्रत्याशियो को महँगा पड़ेगा।

सच पूँछो तो कैसरगंज की विधान सभा घाघरा व सरयू की कछार मे है बढ़ पीड़ितों को स्थाई तौर पर नेताओ ने कोई पहल नही की सम्पर्क मार्गो की दशा दयनीय है रोजगार के लिए न कोई फैक्ट्री है न कारखाना रोजी रोटी के लिए लोग महानगरों मे पलायन करते है लड़कियों के लिये दम तोड़ती शिक्षा व्यवस्था नव जवानों के लिए खेल का मैदान व समुचित स्वास्थ व्यवस्था के रोने पर जनप्रतिनिधियों ने लोगो के आँसू नही पोंछे जिसका खामियाजा कौन भुगतेगा जनता तय कर चुकी है फैसला भी 27 फरवरी को मताधिकार की ताकत से सुना देगी जो चमत्कार जैसा होगा।

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