
CA Rajeev Kumar
B.Com (Hons), FCA, LL.B
Founder & Managing Partner – Tax Sanjivani
Fellow Chartered Accountant | Member of ICAI | Over 15 Years of Experience
Con : 9650989444, Email : Rajeev@fcarajeev.com
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 20 मार्च 2026 को आयकर नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे (कर वर्ष 2026-27 / मूल्यांकन वर्ष 2027-28)। ये नियम नए आयकर अधिनियम, 2025 को लागू करते हैं, जो 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 और नियम 1962 की जगह लेगा। नए नियमों में नियमों की संख्या 511 से घटकर 333 रह गई है, भाषा सरल हुई है, डिजिटल अनुपालन पर जोर है और मुकदमेबाजी कम करने का लक्ष्य है।
कर स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई कर व्यवस्था डिफॉल्ट बनी हुई है, जिसमें ₹12 लाख तक शून्य कर (वेतनभोगियों के लिए ₹75,000 मानक कटौती के बाद ₹12.75 लाख तक प्रभावी शून्य कर)। पुरानी व्यवस्था में 80C, HRA जैसी छूटें उपलब्ध हैं। मुख्य फायदा प्रक्रियात्मक बदलावों से आ रहा है — भत्तों की छूट सीमाएं बढ़ी हैं, पेरक्विजिट मूल्यांकन अपडेट हुआ है और अनुपालन आसान हुआ है।
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़े फायदे: अधिक छूट और आसान दावा
वेतनभोगी करदाताओं, खासकर पुरानी कर व्यवस्था चुनने वालों के लिए ये नियम सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं। मुद्रास्फीति और बाजार की वास्तविकता को ध्यान में रखकर भत्तों और पेरक्विजिट की सीमाएं बढ़ाई गई हैं।
HRA छूट में बड़ा विस्तार सबसे महत्वपूर्ण बदलाव: चार नई टेक हब शहर — बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद — को 50% HRA छूट वाली सूची में शामिल कर लिया गया है। अब कुल आठ शहर (मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद) 50% छूट के योग्य हैं, जबकि बाकी जगहों पर 40%। HRA छूट का फॉर्मूला वही है — प्राप्त HRA, किराए में 10% वेतन घटाकर बचा राशि, या वेतन का 50%/40% — इनमें सबसे कम। उदाहरण: बेंगलुरु में ₹15 लाख वार्षिक वेतन और ₹60,000 मासिक किराया वाले व्यक्ति को अब पहले से ₹1-1.5 लाख अतिरिक्त टैक्स बचत हो सकती है। नया नियम: अगर कुल किराया ₹1 लाख से ज्यादा है तो फॉर्म नंबर 124 में मकान मालिक का नाम, PAN, पता और संबंध बताना अनिवार्य है। इससे फर्जी दावे रुकेंगे, लेकिन डिजिटल फॉर्म से काम आसान रहेगा।
विशेष भत्तों में भारी बढ़ोतरी अनुसूची III के तहत छूट सीमाएं काफी बढ़ाई गई हैं:
- बच्चों की शिक्षा भत्ता: ₹100 प्रति माह प्रति बच्चे से बढ़कर ₹3,000 प्रति माह (अधिकतम दो बच्चे)।
- हॉस्टल व्यय भत्ता: ₹300 से बढ़कर ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चे। दो स्कूल जाने वाले बच्चों वाले परिवार अब सालाना ₹72,000 (शिक्षा) + ₹2.16 लाख (हॉस्टल) तक टैक्स-फ्री छूट ले सकते हैं — मध्यम वर्ग के माता-पिता के लिए बड़ा राहत।
- परिवहन भत्ता (विशेष रूप से विकलांग कर्मचारियों के लिए): मेट्रो में ₹15,000 + DA, अन्य जगह ₹8,000 + DA।
- मुफ्त भोजन/मील कार्ड: ₹200 प्रति भोजन तक टैक्स-फ्री (पहले ₹50)। ऑफिस कैंटीन या वाउचर अब ज्यादा आकर्षक।
- नॉन–कैश गिफ्ट/कूपन: सालाना ₹15,000 तक टैक्स-फ्री (पहले ₹5,000)।
ये बदलाव वर्तमान लागत से मेल खाते हैं और नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले लाभों को वास्तविक टैक्स बचत देते हैं।
पेरक्विजिट मूल्यांकन में सुधार नियम 15 के तहत टेबल अपडेट हुई:
- कंपनी कार: बाजार मूल्य के अनुसार टैक्सेबल वैल्यू (इंजन साइज के आधार पर ₹5,000-₹7,000 मासिक + ड्राइवर के लिए अतिरिक्त; सरकारी उपयोग पर शून्य)। लग्जरी कार पर थोड़ा ज्यादा टैक्स, लेकिन आधिकारिक उपयोग रिकॉर्ड से बचत संभव।
- रियायती ऋण: कुल बकाया ₹2 लाख तक शून्य पेरक्विजिट (कैंसर, टीबी जैसी बीमारियों पर अतिरिक्त छूट)।
- विदेशी चिकित्सा उपचार: छूट सीमा वेतन ₹8 लाख तक बढ़ाई गई।
₹75,000 मानक कटौती (नई व्यवस्था) और सरलीकृत फॉर्म नंबर 130 (TDS प्रमाणपत्र) के साथ फाइलिंग तेज हो गई है। पुरानी व्यवस्था चुनने वाले वेतनभोगी अब ₹50,000 से ₹2 लाख+ सालाना अतिरिक्त बचत कर सकते हैं, खासकर नए HRA शहरों या बच्चों वाले परिवारों में। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च छूट वाले मामलों में पुरानी व्यवस्था अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गई है।
व्यवसायियों और पेशेवरों के लिए सुव्यवस्थित लाभ
स्वरोजगार करने वाले पेशेवर, छोटे व्यवसायी और अनुमानित करदाताओं को डिजिटलीकरण और ढीली सीमाओं से फायदा।
- डिजिटल रिकॉर्ड रखरखाव: किताबें अब डिजिटल रूप में (ई-रुपया/CBDC स्वीकार्य)। इससे दस्तावेजी विवाद कम होंगे।
- PAN उद्धरण की सीमा बढ़ी: कई लेन-देनों में थ्रेशोल्ड ऊंचा — जैसे अचल संपत्ति ₹20 लाख से ज्यादा, वाहन ₹5 लाख, होटल नकद भुगतान ₹1 लाख। संपत्ति SFT रिपोर्टिंग सीमा ₹45 लाख। छोटे लेन-देन में PAN अनिवार्यता कम।
- सरलीकृत ITR फॉर्म: ITR-4 (सुगम) और अनुमानित योजनाएं आसान। टर्नओवर ₹75 लाख तक (कुछ मामलों में ज्यादा) बिना अटैचमेंट के फाइलिंग।
छोटे व्यवसाय समय और अनुपालन लागत बचाएंगे। कुल मिलाकर 333 नियम और ऑटो-फिल फॉर्म से गलतियां और जुर्माना कम होगा।
कंपनियों के लिए स्पष्ट (लेकिन सख्त) अनुपालन
कंपनियों को मुकदमेबाजी कम होने और मानकीकृत प्रक्रियाओं से फायदा, हालांकि रिपोर्टिंग मजबूत हुई है।
डिविडेंड नियम सरल शेयर रजिस्टर भारत में रखना, AGM देश में आयोजित करना और डिविडेंड केवल भारत में भुगतान — विदेशी निवेशकों और कंपनियों को निश्चितता मिलेगी।
स्टॉक एक्सचेंज मान्यता सख्त डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए 7 साल का ऑडिट ट्रेल, ट्रांजेक्शन मिटाने पर रोक और मासिक फॉर्म नंबर 1 में क्लाइंट कोड बदलाव की रिपोर्टिंग। इससे पारदर्शी कंपनियों को फायदा, हेराफेरी रुकेगी।
अन्य सुविधाएं
- 150+ नए फॉर्म (पूर्व-भरे) से TDS/TCS प्रमाणपत्र आसान।
- ऑडिटर को विदेशी टैक्स क्रेडिट, PAN लिंकेज की जांच करनी होगी — असेसमेंट में सरप्राइज कम।
- डिजिटल पोर्टल से कम/शून्य TDS प्रमाणपत्र आसानी से।
बड़ी कंपनियां डिविडेंड और एक्सचेंज नियमों की पूर्वानुमानितता से लाभान्वित होंगी, भले रिपोर्टिंग बढ़ी हो। नए अधिनियम से धाराएं 819 से घटकर 536 रह गई हैं और शब्द आधे हो गए।
निष्कर्ष: आधुनिक और करदाता–अनुकूल बदलाव
आयकर नियम 2026 प्रक्रियात्मक और अनुपालन सुधार पर केंद्रित हैं। वेतनभोगियों को मुद्रास्फीति-अनुकूल छूट (HRA में आठ शहर, परिवार भत्ते) से हजारों रुपये बचत; व्यवसायियों को डिजिटल सरलता और ऊंची सीमाएं; कंपनियों को नियामकीय स्पष्टता। कोई पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं — केवल आगे की आधुनिकीकरण।
करदाताओं को सलाह: 1 अप्रैल 2026 से पहले सैलरी संरचना (पुरानी vs नई व्यवस्था) की समीक्षा करें और नए फॉर्म अपडेट करें। आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर नवीनतम जानकारी लें। ज्यादातर लोगों के लिए प्रभावी टैक्स बोझ कम और कागजी काम घटेगा — “Ease of Doing Business” और “Ease of Living” की दिशा में स्वागत योग्य कदम। व्यक्तिगत प्रभाव के लिए कर सलाहकार से संपर्क करें।












