भारत-US डील से मची खलबली : ‘हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया’, पाक के रक्षा मंत्री ने उगला अमेरिका के खिलाफ जहर

इस्लामाबाद: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती ताकत और अमेरिका के साथ मजबूत होते रिश्तों के बीच अब पाकिस्तान का दर्द छलक कर सामने आया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में खड़े होकर अमेरिका को लेकर जो बयान दिया है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। आसिफ ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान की “चापलूसी” का कोई सिला नहीं दिया और उन्हें एक वस्तु की तरह इस्तेमाल कर छोड़ दिया।

‘अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया’

पाकिस्तानी संसद में बोलते हुए रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी ही पुरानी नीतियों पर आत्ममंथन करने के बजाय अमेरिका पर सारा ठीकरा फोड़ दिया। उन्होंने अपमानजनक उपमाओं का सहारा लेते हुए कहा, “हमने अमेरिका के लिए क्या नहीं किया? हमने उन्हें अपना एयरस्पेस दिया, कराची पोर्ट दिया और अपने जवान तक झोंक दिए। लेकिन बदले में अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल एक टिशू पेपर से भी बदतर तरीके से ‘टॉयलेट पेपर’ की तरह किया और काम निकल जाने के बाद हमें कचरे में फेंक दिया।” उन्होंने कहा कि अमेरिका की गुलामी करने का पाकिस्तान को सिर्फ नुकसान ही उठाना पड़ा है।

अफगानिस्तान जंग में शामिल होने पर जताया गहरा पछतावा

ख्वाजा आसिफ ने 80 के दशक के अफगानिस्तान युद्ध और 2001 के बाद तालिबान के खिलाफ जंग में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रूस के खिलाफ लड़ा गया युद्ध असल में ‘जिहाद’ नहीं था, बल्कि अमेरिका के इशारे पर शुरू किया गया एक विद्रोह था। उन्होंने स्वीकार किया कि तत्कालीन पाकिस्तानी सरकारों ने अमेरिका के दबाव और लालच में आकर अपने लोगों को इस आग में झोंका, जिसकी कीमत मुल्क आज भी आतंकवाद और आर्थिक बदहाली के रूप में चुका रहा है।

जिया-उल-हक और मुशर्रफ पर साधा निशाना, बोले- बैसाखियों के लिए बेचा देश

अपनी तकरीर के दौरान रक्षा मंत्री ने पूर्व सेना प्रमुखों जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ की जमकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सैन्य तानाशाहों ने अमेरिका की ‘बैसाखियों’ के सहारे अपनी सत्ता चलाने के लिए देश को युद्धों की भट्टी में झोंक दिया। आसिफ ने कहा कि उन फैसलों की भरपाई कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि युद्धों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान ने अपने शिक्षा पाठ्यक्रम (Syllabus) में भी जहर घोला, जिसे आज तक सुधारा नहीं जा सका है।

भारत-अमेरिका की नजदीकी ने बढ़ाई पाकिस्तान की बेचैनी

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का यह गुस्सा दरअसल भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी का नतीजा है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अमेरिका के साथ बड़े रक्षा और व्यापारिक समझौते कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए अप्रासंगिक होता जा रहा है। अमेरिका के जाने के बाद पाकिस्तान अब खुद के पाले हुए आतंकवाद और चरमराती अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है, और अब उसे अपने पुराने “आका” अमेरिका में दुश्मन नजर आने लगा है। 

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