
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर अपनी धाक जमाते हुए ‘मिशन चंद्रयान-4’ के लिए सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (SAC) के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर उस सटीक जगह को ढूंढ निकाला है, जहां भारत का अगला मून मिशन कदम रखेगा। यह खोज इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि चंद्रयान-4 केवल चांद पर उतरने का मिशन नहीं है, बल्कि यह भारत का पहला ‘रिटर्न मिशन’ होगा, जो चांद की मिट्टी और पत्थरों को लेकर धरती पर वापस लौटेगा।
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने दिखाई राह, वैज्ञानिकों ने खोजा ‘सेफ जोन’
इसरो की टीम ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरों का महीनों तक बारीकी से अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने लैंडिंग के लिए चार संभावित जगहों की पहचान की थी, जिनमें से गहन विश्लेषण के बाद ‘एमएम-4’ (MM-4) नामक स्थान को फाइनल किया गया है। लगभग 1 वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र को लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। वैज्ञानिकों की इस विशेष टीम ने सतह की बनावट, ढलान और वहां मौजूद बाधाओं की जांच के बाद इस स्थल पर मुहर लगाई है।
क्यों खास है ‘एमएम-4’ लैंडिंग साइट?
चुनी गई लैंडिंग साइट ‘नॉविस माउंटेन’ (Novis Mountain) पहाड़ी के पास स्थित है। पहाड़ी क्षेत्र के करीब होने के बावजूद यह हिस्सा काफी समतल है, जिससे लैंडिंग के दौरान खतरे की आशंका बेहद कम है। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाली सूर्य की पर्याप्त रोशनी है। सौर ऊर्जा पर निर्भर उपकरणों के लिए यह रोशनी पावर बैंक का काम करेगी। साथ ही, इस क्षेत्र में बड़े गड्ढों (Craters) का अभाव है, जिससे रोवर को चांद की सतह पर चहलकदमी करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
शिव-शक्ति पॉइंट के करीब होगा चंद्रयान-4
दिलचस्प बात यह है कि यह नया लैंडिंग स्थल चंद्रयान-3 की सफलता की गवाह रही ‘शिव-शक्ति पॉइंट’ से ज्यादा दूर नहीं है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस क्षेत्र के गहरे और अंधेरे गड्ढों में बर्फ या पानी के अवशेष छिपे हो सकते हैं। अगर चंद्रयान-4 यहां से नमूने लाने में सफल रहता है, तो यह चंद्रमा के निर्माण और वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधनों को समझने के लिए वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा।
पांच मॉड्यूल्स वाला सबसे जटिल मिशन
चंद्रयान-4 तकनीक के मामले में चंद्रयान-3 से कई गुना ज्यादा एडवांस और जटिल होने वाला है। इस मिशन में केवल लैंडर और रोवर नहीं, बल्कि कुल पांच मॉड्यूल शामिल होंगे। इसमें प्रोपल्सन मॉड्यूल के साथ-साथ डिसेंटर (उतरने वाला), असेंडर (ऊपर जाने वाला), ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल (धरती पर लौटने वाला) हिस्सा होंगे। यह मिशन भारत के भविष्य के मानवयुक्त मिशन (गगनयान) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इससे यह सिद्ध हो जाएगा कि इसरो न केवल चांद पर जा सकता है, बल्कि वहां से सुरक्षित वापस भी आ सकता है।














