JDU में ‘घर का भेदी’ बना काल: बांका सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर लटकी तलवार, अपनी ही पार्टी ने स्पीकर को भेजी चिट्ठी

पटना/दिल्ली: बिहार की राजनीति के गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रहा अंतर्कलह अब आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है। बांका से जेडीयू के कद्दावर सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता पर अब खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरधारी यादव की घेराबंदी किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी के संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत ने की है। कामैत ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव को अयोग्य ठहराने की सिफारिश कर दी है, जिससे सियासी हड़कंप मच गया है।

अपनों ने ही खोला मोर्चा, ‘अनुशासन’ की धुरी पर फंसा मामला

जेडीयू के गलियारों में चर्चा तेज है कि गिरधारी यादव पर पिछले काफी समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लग रहे थे। अनुशासन का यह मामला तब और गंभीर हो गया जब उनके बयानों को सीधे तौर पर नीतीश कुमार की नीतियों और पार्टी लाइन के खिलाफ पाया गया। सूत्रों की मानें तो पार्टी अब उन्हें और अधिक ढील देने के मूड में नहीं है। जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि गिरधारी यादव के बागी तेवरों ने सदन और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की किरकिरी कराई है, जिसके चलते अब उनके खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी कर ली गई है।

चुनाव आयोग पर उठाए थे सवाल: ‘क्या मैं गलत वोटर लिस्ट से जीता?’

गिरधारी यादव की मुश्किलों की शुरुआत पिछले साल उस वक्त हुई थी, जब जेडीयू ने उन्हें एक कारण बताओ नोटिस थमाया था। मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा था। गिरधारी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागते हुए पूछा था कि “यदि लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट सही थी, तो विधानसभा चुनाव के लिए इसमें बदलाव की क्या जरूरत है?” उन्होंने तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया था कि “क्या मैं गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुआ हूँ?” बाढ़ और खेती के सीजन में आयोग की इस प्रक्रिया को चलाने की आलोचना को पार्टी ने ‘गंभीर अनुशासनहीनता’ माना है, क्योंकि जेडीयू हमेशा से संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की पक्षधर रही है।

बेटे का ‘लालटेन’ थामना बना जी का जंजाल, जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ लड़ा था चुनाव

सांसद गिरधारी यादव के लिए ‘कोढ़ में खाज’ का काम उनके बेटे चाणक्य प्रकाश की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने किया। लंदन से शिक्षित चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में जेडीयू के आधिकारिक प्रत्याशी मनोज यादव के खिलाफ ताल ठोक दी थी। उन्होंने राजद (RJD) के टिकट पर चुनाव लड़ा, जो जेडीयू नेतृत्व को बिल्कुल नागवार गुजरा। खास बात यह है कि बेलहर सीट, जहाँ से गिरधारी यादव खुद दो बार विधायक रह चुके हैं, वहाँ उनके बेटे का विपक्षी खेमे से चुनाव लड़ना उनकी निष्ठा पर बड़े सवाल खड़े कर गया। हालांकि चाणक्य चुनाव हार गए, लेकिन इस घटना ने गिरधारी यादव की विदाई की पटकथा लिख दी।

अब स्पीकर के पाले में गेंद, क्या जाएगी सांसद की कुर्सी?

दिलेश्वर कामैत की चिट्ठी के बाद अब सबकी निगाहें लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी हैं। क्या गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द होगी या उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलेगा? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जेडीयू ने यह कदम उठाकर अपने अन्य बागी नेताओं को भी कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। फिलहाल, बांका की राजनीति में उबाल है और गिरधारी यादव के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment