ट्रंप की ‘सार्थक बातचीत’ दावे पर भड़का ईरान, होर्मुज को लेकर अमेरिका को दी सीधी चेतावनी

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ “सार्थक और रचनात्मक” बातचीत के दावे को तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वॉशिंगटन के साथ किसी भी प्रकार की कोई गुप्त या प्रत्यक्ष वार्ता नहीं चल रही है। ईरान ने ट्रंप के बयानों को ‘भ्रामक’ और युद्ध के बीच समय हासिल करने वाली एक ‘रणनीतिक चाल’ करार दिया है।

ट्रंप का ‘शांति’ वाला पैंतरा और ईरान का पलटवार

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया था कि पिछले दो दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी खत्म करने को लेकर बहुत अच्छी बातचीत हुई है। उन्होंने घोषणा की थी कि इस बातचीत के मद्देनजर वह ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए टाल रहे हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन दावों की हवा निकाल दी है। ईरानी मिलिटरी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने साफ कहा है कि जब तक युद्ध में उनके मकसद पूरे नहीं हो जाते, तब तक इस्लामिक रिपब्लिक कोई बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त घेराबंदी

ईरान ने न केवल बातचीत के दावों को झूठा बताया, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने फिर दोहराया कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘हमलावरों’ के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। तेहरान का मानना है कि ट्रंप की धमकियां और फिर अचानक शांति की बातें केवल अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और अपनी सैन्य योजनाओं को नया रूप देने के लिए समय बटोरने की कोशिश है।

“थोपा गया है युद्ध, अमेरिका-इजरायल के हाथ में है अंत”

अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के मुताबिक, ईरान ने क्षेत्रीय देशों द्वारा तनाव कम करने की कोशिशों को तो स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी चिंताएं उन देशों के सामने रखनी चाहिए जिन्होंने यह युद्ध शुरू किया है। ईरान का तर्क है कि यह युद्ध उस पर और पूरे क्षेत्र पर थोपा गया है। तेहरान ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की चाबी अब पूरी तरह से अमेरिका और इजरायल के पास है।

क्या था ट्रंप का ‘5 दिन’ वाला अल्टीमेटम?

ज्ञात हो कि इससे पहले ट्रंप ने शनिवार को बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए ईरान को 48 घंटे की मोहलत दी थी। उन्होंने धमकी दी थी कि यदि ईरान ने बिना शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका उसके सबसे बड़े ऊर्जा संयंत्रों को तबाह कर देगा। लेकिन इसके बाद ट्रंप ने अचानक ‘सार्थक बातचीत’ का हवाला देते हुए हमलों को 5 दिन टालने का आदेश दिया, जिसे अब ईरान ने महज एक दिखावा बताया है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद से ही क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

ईरान से बातचीत में “बड़ी सहमति” का दावा, ट्रम्प बोले— शीर्ष स्तर पर जारी है संवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच “कई अहम मुद्दों पर सहमति” बनी है और युद्ध खत्म करने के लिए उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।

ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ईरान की सरकार के एक “शीर्ष व्यक्ति” के संपर्क में है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्ति मोजतबा खामेनेई नहीं हैं, जिनका नाम हाल के दिनों में चर्चा में रहा है।

ट्रम्प के मुताबिक, दोनों देशों के बीच करीब 15 बिंदुओं पर सहमति बनी है। इनमें ईरान का परमाणु हथियार न रखने का वादा भी शामिल है। हालांकि, ईरान पहले भी सार्वजनिक रूप से इस तरह की बात कह चुका है और उसने अमेरिका के साथ किसी औपचारिक बातचीत से इनकार किया है।

राष्ट्रपति ने ईरानी तेल पर संभावित प्रतिबंधों में ढील को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऊर्जा संकट के बीच सप्लाई को बनाए रखना है और इससे युद्ध की स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी वह पेंटागन के लिए 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग करेंगे। उनका कहना था कि मजबूत रक्षा तैयारियां हमेशा जरूरी होती हैं।

ट्रम्प ने विश्वास जताया कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही पूरी तरह खुल जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि इस अहम समुद्री मार्ग का संचालन अमेरिका और ईरान मिलकर करें।

ट्रम्प के इन बयानों के बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अब तक इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

ईरान युद्ध रोकने के लिए तुर्किए की कूटनीतिक पहल तेज, 48 घंटे में कई देशों से संपर्क

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों के तहत तुर्किए ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। देश के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने पिछले 48 घंटों में एक दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय नेताओं और अधिकारियों से बातचीत की है।

सूत्रों के मुताबिक, फिदान ने ईरान और मिस्र के विदेश मंत्रियों के अलावा अमेरिका और यूरोपीय संघ के अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की। इन चर्चाओं में युद्ध रोकने के संभावित उपायों पर विचार किया गया।

इसके अलावा, उन्होंने कतर, सऊदी अरब और पाकिस्तान के नेताओं से भी संपर्क साधा, जहां युद्ध समाप्त करने के प्रयासों की समीक्षा की गई।

सोमवार को भी कूटनीतिक प्रयास जारी रहे, जिसमें नॉर्वे और मिस्र के नेताओं के साथ बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, इन वार्ताओं का मुख्य फोकस तनाव कम करने और संघर्ष को समाप्त करने के उपायों पर रहा।

जानकारों का कहना है कि तुर्किए और मिस्र दोनों ही पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं। यह पहल खासतौर पर ऊर्जा ढांचे और बिजली संयंत्रों पर बढ़ते हमलों के बीच तनाव कम करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

हालांकि, तुर्किए विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इन मध्यस्थता प्रयासों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार किया है।

उल्लेखनीय है कि तुर्किए की यह सक्रिय कूटनीति क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है, खासकर ऐसे समय में जब संघर्ष लगातार व्यापक रूप लेता जा रहा है।

पाकिस्तान ने ईरान से बातचीत में शांति की अपील की, पीएम शहबाज शरीफ बोले- तनाव घटाना जरूरी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से फोन पर बातचीत की और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच खाड़ी क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की तत्काल आवश्यकता पर सहमति जताई।

दोनों नेताओं के बीच पिछले एक महीने में कई बार बातचीत हो चुकी है। इनमें रमजान और ईद की शुभकामनाओं के आदान-प्रदान के साथ-साथ अमेरिका और इजराइल के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने पर भी चर्चा शामिल रही। शरीफ ने ईरानी जनता के साथ एकजुटता जताते हुए हालिया घटनाओं में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए “रचनात्मक भूमिका” निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम देशों के बीच एकता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस तरह की बातचीत मौजूदा संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की दिशा में अहम कदम हो सकती है, खासकर तब जब क्षेत्र में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।

ओमान में अमेरिकी दूतावास की एडवाइजरी— “घर में सुरक्षित रहें”, बढ़ते तनाव के बीच चेतावनी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी दूतावास ने ओमान में “शेल्टर इन प्लेस” यानी जहां हैं वहीं सुरक्षित रहने की एडवाइजरी जारी की है। यह चेतावनी पूरे देश के लिए दी गई है, हालांकि “चल रही गतिविधियों” के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई। दूतावास ने अपने सुरक्षा अलर्ट में नागरिकों से कहा है कि वे अपने घर या किसी सुरक्षित इमारत में रहें और अनावश्यक बाहर न निकलें। साथ ही, भोजन, पानी, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त भंडार रखने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अगर किसी तरह का हमला होता है तो लोग मलबे या क्षतिग्रस्त स्थानों से दूर रहें और आधिकारिक सूचनाओं के लिए विश्वसनीय समाचार माध्यमों पर नजर बनाए रखें। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने ओमान से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने के निर्देश दिए थे। यह कदम ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल संघर्ष शुरू होने के कुछ दिनों बाद उठाया गया था। यह चेतावनी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और संभावित खतरों को देखते हुए जारी की गई है। इससे साफ है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए सतर्क हैं।

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