भारत आ रहा ईरानी तेल का जहाज अचानक मुड़ा चीन की तरफ, मंजिल के करीब आकर क्यों बदला रास्ता?

नई दिल्ली/गांधीनगर। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान से करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक विशाल मालवाहक जहाज ‘पिंग शुन’ (Ping Shun) अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंचकर अचानक चीन की तरफ मुड़ गया है। गुरुवार रात तक यह जहाज अरब सागर में भारतीय समुद्री सीमा की ओर बढ़ रहा था और इसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह (Vadinar Port) पहुंचने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन आखिरी वक्त में इसके रास्ते में आए बदलाव ने रणनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

मंजिल के करीब आकर क्यों बदला रास्ता?

ग्लोबल ट्रेड डेटा इंटेलिजेंस और तेल बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, जहाज के अचानक रास्ता बदलने के पीछे सबसे बड़ी वजह भुगतान (Payment) की शर्तों में आया बदलाव है। बाजार सूत्रों का कहना है कि ईरानी तेल विक्रेताओं ने अचानक अपनी पुरानी नीति बदल दी है। पहले जहां तेल की खेप के लिए 30 से 60 दिनों की ‘क्रेडिट विंडो’ (उधार की सुविधा) दी जाती थी, अब ईरानी पक्ष ‘एडवांस पेमेंट’ यानी पहले भुगतान की मांग कर रहा है। इसी वित्तीय पेंच के कारण जहाज ने अपना रुख भारत से हटाकर चीन की ओर कर लिया है।

भारतीय रिफाइनरियों के बीच बढ़ी सस्पेंस

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह 6 लाख बैरल कच्चा तेल किस भारतीय रिफाइनरी ने ऑर्डर किया था। गुजरात का वाडिनार बंदरगाह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी दिग्गज कंपनियां अपना कच्चा तेल मंगाती हैं। रिफाइनरी मॉडलिंग विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक प्रवाह में वित्तीय शर्तें और ‘काउंटरपार्टी रिस्क’ (लेनदेन का जोखिम) अब पहले से कहीं अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

क्या फिर से भारत लौट सकता है जहाज?

विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि यह पूरी तरह से एक कमर्शियल डील का मामला है। अगर भारतीय खरीदार और ईरानी विक्रेता के बीच भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो जाता है, तो इस कार्गो को बीच समुद्र से वापस भारत की तरफ मोड़ा जा सकता है। हालांकि, इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि चीन के अलावा अन्य देशों को ईरानी तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने में अब केवल लॉजिस्टिक्स ही नहीं, बल्कि सख्त कमर्शियल शर्तें भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

ईरानी तेल और वैश्विक समीकरण

ईरानी कच्चे तेल के मामले में सफर के बीच में रास्ता बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारत जैसे बड़े बाजार के लिए यह एक संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान की शर्तें कितनी अस्थिर हो सकती हैं। चीन वर्तमान में ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और वहां अक्सर भुगतान की प्रक्रिया सुगम रहती है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक तेल आपूर्ति के लिए इन वित्तीय चुनौतियों का ठोस समाधान तलाशना होगा।

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