ईरान के कड़े तेवर: ‘अमरीकी धोखे को न भूले हैं, न भूलेंगे’, इस्लामाबाद वार्ता के बीच तेहरान ने दी दोटूक चेतावनी

इस्लामाबाद/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक बातचीत के बीच तेहरान ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पाकिस्तानी सरजमीं पर जारी संवाद के दौर के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वे वाशिंगटन पर भरोसा करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका के पिछले “वादाखिलाफी” के इतिहास को कुरेदा है।

‘डिप्लोमेसी हमारे लिए पवित्र जिहाद जैसी’

इस्माइल बाकई ने अपने बयान में कूटनीति को एक नई परिभाषा देते हुए कहा कि हमारे लिए बातचीत की मेज पर बैठना ईरानी जमीन के रक्षकों के ‘पवि‍त्र जिहाद’ को जारी रखने जैसा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, “हम अमेरिका द्वारा वादे तोड़ने और उनके गलत कामों के कड़वे अनुभवों को न भूले हैं और न ही कभी भूलेंगे।” बाकई ने आगे कहा कि ईरान उन अपराधों को कभी माफ नहीं करेगा जो ‘यहूदी शासन’ और अमेरिका ने पिछले युद्धों के दौरान ईरानी जनता के खिलाफ किए हैं।

इस्लामाबाद में लंबी और तनावपूर्ण बातचीत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही इस वार्ता को बाकई ने बेहद “व्यस्त और लंबा दिन” करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि वार्ता की शुरुआत से ही दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की एक गहरी खाई मौजूद है। प्रवक्ता के अनुसार, किसी ने भी एक दौर की बातचीत में किसी चमत्कारिक नतीजे की उम्मीद नहीं की थी। ईरानी डेलिगेशन ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी पूरी काबिलियत, अनुभव और जानकारी का उपयोग केवल ईरान के राष्ट्रीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच

पिछले 24 घंटों की मैराथन बैठकों में कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait), ईरान का परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program), युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना, आर्थिक पाबंदियों (Sanctions) में राहत और क्षेत्रीय विवादों को सुलझाना शामिल था। बाकई ने जोर देकर कहा कि इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता पूरी तरह से अमेरिका की गंभीरता और उसकी “अवैध मांगों” को छोड़ने पर निर्भर करती है।

अमेरिका की ‘बेतुकी शर्तों’ ने बढ़ाया विवाद

ईरानी समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान कुछ शुरुआती प्रगति तो दिखी है, लेकिन गंभीर मतभेद जस के तस बने हुए हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की तरफ से पेश की गई शर्तें “बेतुकी और बहुत ज्यादा” हैं, जिन्हें स्वीकार करना ईरान की संप्रभुता के खिलाफ होगा। बाकई ने अंत में दोहराया कि कोई भी शक्ति ईरान को उसके ऐतिहासिक मिशन और महान सभ्यता के हितों की रक्षा करने से नहीं रोक सकती। ईरान अपने हितों के लिए कूटनीति सहित सभी विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment