कानपुर किडनी कांड: 10 लाख में खरीदी और 90 लाख में बेची; डॉक्टर दंपती समेत 10 हिरासत में, 50 हजार के विवाद ने खोला ‘खूनी खेल’ का राज

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है जो इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला है। कल्याणपुर इलाके में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा था, जहाँ एक गरीब युवक की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी किडनी महज 10 लाख रुपये में खरीदी गई और उसे जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया। पुलिस ने इस मामले में दलाल, अस्पताल संचालक और एक डॉक्टर दंपती समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया है।

50 हजार रुपये के लिए दलाल ने की ‘कंजूसी’ और खुल गया राज

इस पूरे काले साम्राज्य का पर्दाफाश तब हुआ जब लालच की भेंट चढ़े दलाल और डोनर के बीच पैसों को लेकर विवाद हो गया।

  • सौदा: दलाल शिवम अग्रवाल ने उत्तराखंड के एक युवक से 10 लाख रुपये में किडनी का सौदा किया था।

  • धोखा: शिवम ने युवक को 9.5 लाख रुपये (6 लाख नकद और 3.5 लाख का चेक) दिए, लेकिन बाकी के 50 हजार रुपये देने में आनाकानी करने लगा।

  • खुलासा: परेशान होकर पीड़ित युवक ने पुलिस से शिकायत कर दी। पुलिस ने जब कड़ियां जोड़ीं तो कल्याणपुर के अस्पतालों में चल रहे इस खौफनाक रैकेट की परतें खुलती चली गईं।

‘रिश्तेदार’ बताकर इमोशनल ब्लैकमेल और करोड़ों का मुनाफा

पकड़े गए मुख्य आरोपी शिवम ने पूछताछ में बताया कि यह धंधा बेहद शातिर तरीके से चलता था:

  1. पहचान छुपाना: पकड़े न जाएं, इसके लिए डोनर को मरीज का ‘दूर का रिश्तेदार’ बताया जाता था।

  2. दोहरा खेल: डोनर को बताया जाता कि रिश्तेदार मर रहा है, इसलिए कम दाम में किडनी दे दो। वहीं, मरीज के परिजनों को उसकी गिरती सेहत का हवाला देकर डराया जाता और किडनी के इंतजाम के नाम पर करोड़ों वसूले जाते।

  3. फर्जी बीमारी: पकड़े जाने के डर से डोनर को अस्पताल के कागजों पर गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों का रोगी बताकर भर्ती किया जाता था ताकि किसी को शक न हो।

दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से आती थी ‘स्पेशलिस्ट’ डॉक्टरों की टीम

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन अवैध सर्जरी के लिए स्थानीय डॉक्टरों के बजाय लखनऊ, दिल्ली और मुंबई से सुपर स्पेशलिस्ट बुलाए जाते थे। इस टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, ग्राफ्टिंग एक्सपर्ट और एनेस्थेसिस्ट शामिल होते थे। सर्जरी के 24 घंटे बाद ही मरीज और डोनर को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता था ताकि पुलिस को सुराग न मिले।

बंद हो चुके अस्पतालों में चल रहा था ‘ऑपरेशन’

हैरानी की बात यह है कि पुलिस को एक किडनी डोनर ऐसे अस्पताल (आरोही हॉस्पिटल) में भर्ती मिला जो करीब दो महीने पहले ही बंद हो चुका था। पुलिस ने सोमवार रात कल्याणपुर और पनकी क्षेत्र के तीन प्रमुख अस्पतालों—प्रिया हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल—पर छापेमारी की है। एक अस्पताल का संबंध आईएमए (IMA) के एक बड़े पदाधिकारी से भी बताया जा रहा है।

22 साल पुराना इतिहास और बंगाल-हरियाणा तक तार

कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मामले की जड़ें खंगालने के लिए टीमें पश्चिम बंगाल और हरियाणा भी भेजी गई हैं। शहर में 22 साल पहले भी ऐसा ही एक बड़ा किडनी रैकेट पकड़ा गया था, जिसमें शामिल कुछ सर्जन आज भी चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय हैं। पुलिस अब उन सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। फिलहाल, डोनर और किडनी लेने वाली महिला मरीज को पुलिस सुरक्षा में सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है।

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