
कानपुर। मुख्य संवाददाता: जहां एक तरफ छात्र लाखों रुपये खर्च कर और दिन-रात पढ़ाई में पसीना बहाकर डिग्री हासिल करते हैं, वहीं कानपुर में कुछ शातिर महज चंद हजार रुपयों में डिग्रियां बांट रहे थे। किदवई नगर पुलिस ने शिक्षा जगत में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है। पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास संचालित एक फर्जी ऑफिस पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अनपढ़ों को ग्रेजुएट बनाने से लेकर फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट तक तैयार करने का काला कारोबार कर रहे थे।
गौशाला चौराहे पर ‘एजुकेशन हब’ की आड़ में फर्जीवाड़ा
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए बताया कि किदवई नगर पुलिस क्षेत्र में गश्त पर थी, तभी मुखबिर से सूचना मिली कि गौशाला चौराहे के पास ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ नाम के दफ्तर में फर्जी शैक्षिक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर दबिश दी और संदिग्ध दस्तावेजों के साथ गिरोह के चार सदस्यों को रंगे हाथों धर दबोचा। यह गैंग 10 से 20 हजार रुपये लेकर किसी भी स्कूल या कॉलेज की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट थमा देता था।
बिना परीक्षा दिए बनिए डॉक्टर-वकील, घर बैठे मिलती थी डिग्री
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासे किए, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। आरोपियों ने कबूल किया कि वे हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक (Graduation), स्नातकोत्तर (PG), एलएलबी और यहां तक कि फार्मेसी तक की फर्जी डिग्रियां तैयार करते थे। गैंग ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के नाम पर फर्जी माइग्रेशन बुकलेट तक छपवा ली थी। डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मोहर का इस्तेमाल कर ये शातिर अब तक 80 से अधिक फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर चुके थे।
नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर बना रहे थे फर्जी मार्कशीट
पुलिस की छापेमारी में बरामद दस्तावेजों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अलावा मंगलायतन विश्वविद्यालय, जेएस विश्वविद्यालय, सिक्किम प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, हिमालयन विश्वविद्यालय और स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय जैसे नामी संस्थानों की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट मिले हैं। यह गैंग न केवल नई डिग्रियां बनाता था, बल्कि कम अंकों वाली मार्कशीट को बढ़ाकर ‘मेरिट’ में लाने का खेल भी बखूबी खेलता था।
गिरफ्तार हुए आरोपियों में एमबीए ड्रॉपआउट और भर्ती की तैयारी करने वाले शामिल
पकड़े गए आरोपियों की पहचान शैलेंद्र कुमार (रायबरेली), नागेंद्र मणि त्रिपाठी (कौशांबी), जोगेंद्र (गाजियाबाद/दिल्ली) और अश्वनी कुमार सिंह (उन्नाव) के रूप में हुई है। दिलचस्प बात यह है कि गिरोह का मुख्य सदस्य शैलेंद्र खुद ग्रेजुएट है और एमबीए की पढ़ाई बीच में छोड़ चुका था, जबकि जोगेंद्र ने पुलिस और सेना में भर्ती के लिए फॉर्म भरा था, लेकिन सिलेक्शन न होने पर अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों रवि उर्फ मनीष (हैदराबाद), विनीत (गाजियाबाद), शुभम दुबे (छतरपुर) और मयंक भारद्वाज (मणिपुर) की सरगर्मी से तलाश कर रही है।












