कुशाग्र के कातिल दोषी करार, नजीर बनेगी सजा : दो साल बाद इंसाफ, होनहार के हत्यारों को 22 को मिलेगी सजा

हाईलाइटर्स

  • शहर के बहुचर्चित कुशाग्र कनोडिया हत्याकांड में अदालत ने जयपुरिया स्कूल के हाईस्कूल के छात्र के अपहरण और हत्या में उसकी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स के साथ टीचर के आशिक प्रभात शुक्ला अपहरण और साथी शिवा गुप्ता को गुनहगार मानते हुए सजा के लिए 22 जनवरी की तारीख को तय किया है। कोर्ट का फैसला आते ही कुशाग्र की मम्मी-पापा की आंखों से आसूं लुढ़क आए। कुशाग्र का अपहरण क्रिकेट गेमिंग एप में सट्टेबाजी के कारण लाखों रुपए हारने के बाद फिरौती के मकसद से किया गया था, लेकिन पहचान उजागर होने के डर से उसे मार डाला गया था।

भास्कर ब्यूरो
कानपुर। आखिरकार सवा दो साल बाद कुशाग्र कनोडिया के कातिलों को साक्ष्यों-गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अपहरण और कत्ल का दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया है। कातिलों को 22 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता को दोषी करार देते वक्त कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इशारा किया कि, सजा नजीर बनेगी। कोर्ट का फैसला सुनते ही बेटे की मौत के बाद इंसाफ की आस में बैठी कुशाग्र की मां की आंखों से आंसुओं का दरिया उमड़ पड़ा। तीनों आरोपियों को जेल से लाकर अदालत में पेश किया गया था। गौरतलब है कि जयपुरिया स्कूल के हाईस्कूल छात्र कुशाग्र कनोडिया का 30 अक्टूबर 2023 को उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह कोचिंग के लिए घर से निकला था। बाद में प्रभात शुक्ला के घर से उसकी लाश बरामद हुई थी।

गार्ड की समझदारी से दबोचे गए थे कातिल
कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया का परिवार किसी वक्त पटकापुर में रहता था, लेकिन दस साल से परिवार समेत आचार्य नगर के अपार्टमेंट में रहते थे। 30 अक्टूबर 2023 की शाम मनीष का बेटा और जयपुरिया स्कूल में हाईस्कूल का छात्र कुशाग्र ट्यूशन पढ़ने के लिए स्वरूपनगर गया, लेकिन लौटा नहीं। घटना के वक्त मनीष कारोबार के सिलसिले में गुजरात गए थे, लिहाजा मां सोनिया और भाई आदित्य ने फोन किया, लेकिन कुशाग्र का नंबर स्विच ऑफ था। इसी दरमियान, रात नौ बजे के करीब कुशाग्र के अपार्टमेंट के बाहर स्कूटी सवार नकाबपोश युवक हेलमेट लगाए पहुंचा और गार्ड राजेंद्र को बुलाकर एक लिफाफा मनीष कनोडिया के फ्लैट पर पहुंचाने के लिए कहा। नकाबपोश की स्कूटी की आगे की नंबर प्लेट पर कालिख लगी थी, जबकि पिछली नंबर प्लेट पर कपड़ा बंधा था। ऐसे में नकाबपोश पर शक होने के कारण गार्ड ने कहाकि, हेलमेट और नकाब हटाकर अंदर जाकर खुद लिफाफा देकर आए। अंधेरा होने के कारण गार्ड चेहरा तो नहीं देख पाया, लेकिन युवक के अंदर जाते ही कपड़ा हटाकर स्कूटी का नंबर नोट कर लिया। उधर, अनजान युवक जल्दी से कुशाग्र के फ्लैट के बाहर लिफाफा फेंककर लौट गया। लिफाफा खोलने के बाद कुशाग्र के अपहरण और 30 लाख की फिरौती मांगने की खबर फैली तो पुलिस को गार्ड ने किस्सा सुनाया। स्कूटी नंबर की पड़ताल हुई तो वह कुशाग्र की ट्यूशन टीचर रचिता वत्स की निकली।

शक और सट्टेबाजी के कारण कुशाग्र की हत्या
गार्ड की सूचना के आधार पर पुलिस ने रचिता को हिरासत में लिया तो उसने बताया कि, उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला बीते दिन दोपहर में स्कूटी लेकर गया था। कुशाग्र की जानकारी से उसने इंकार किया, लेकिन पुलिस उसे लेकर प्रभात शुक्ला के घर पहुंची तो उसके मकान के बाहरी कमरे में कुशाग्र की रक्तरंजित लाश बरामद हुई। पुलिस ने प्रभात के घर का सीसीटीवी फुटेज खंगाला तो सामने आया कि, सोमवार की शाम प्रभात पहले घर में घुसा और फिर कुशाग्र। करीब 35 मिनट बाद प्रभात घर से अकेले निकलता दिखा है। रचिता उस वक्त साथ मौजूद थी। सख्ती के साथ प्रभात से सवाल-जवाव किये तो उसने बताया कि, कुशाग्र के साथ उसके पहले से पहचान थी। सोमवार की शाम जरीब चौकी चौराहे के पास मुलाकात होने के बाद कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने घर लेकर गया था और मौत के घाट उतार दिया। प्रभात ने बताया कि वह गेमिंग एप और क्रिकेट विश्वकप की सट्टेबाजी में लाखों रुपये हारने के कारण आर्थिक संकट में फंसा था। इसके साथ ही शक था कि, वह धीरे-धीरे रचिता से करीबी बढ़ा रहा है। ऐसे में फिरौती के जरिये अमीर बनने और कुशाग्र को रास्ते से हटाने का दांव खेला था। प्रभात ने बताया कि, साजिश में कामयाब होता तो फिरौती वसूलने के बाद रचिता को लेकर दूसरे शहर में बसने के बाद ब्याह रचा लेता।

कुशाग्र हत्याकांड में फैसला सुनते ही अदालत परिसर में सन्नाटा छा गया। वहीं कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने अदालत के फैसले को इंसाफ की दिशा में बड़ा कदम बताया।

फिरौती के खत में लिखा अल्लाह-हू-अकबर
फिरौती के पत्र में लिखा था, आपसे निवेदन है कि आप ये बात पुलिस के साथ अपनी फैमिली और अगल-बगल किसी को न बताएं कि हमने आपके कुशाग्र को किडनैप कर लिया है। आपके पास दो-तीन दिन का समय है। आप जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम कीजिए। और यह बात कहीं भी फैली तो उसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। अपना बच्चा एक घंटे के अंदर घर में देखो, लेकिन पहले रुपये लेकर रात में दो बजे कोकाकोला चौराहे पर मिलो। मैं रुपये लेने आऊंगा। जैसे रुपये मेरे हाथ में आएंगे, ठीक उसके बाद लड़का आपके घर में होगा। रुपये की व्यवस्था हो जाए तो घर के चारों तरफ पूजन वाला झंडा लगा देना। मैं देख लूंगा और आपको फोन करूंगा। और कोई भी होशियारी हुई तो उसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। आप बिल्कुल भी न घबराओ, आपका लड़का सही सलामत घर पहुंच जाएगा। उसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर है। प्रभात शुक्ला ने यह पत्र अपने दोस्त शिवा के जरिए कुशाग्र के घर भिजवाया था और अंत में भ्रम फैलाने के लिए अल्लाह-हू-अकबर लिखा था, ताकि पुलिस को गुमराह करते हुए घटना के पीछे किसी मुस्लिम अपराधी का हाथ होने का भ्रम फैलाकर खुद को सुरक्षित किया जाए।

14 चेहरों की गवाही और लाश बरामदगी अहम
डीजीसी दिलीप मिश्रा के मुताबिक, आरोपियों की निशानदेही पर प्रभात शुक्ला के घर के बाहर बने कमरे से कुशाग्र की लाश की बरामदगी इस मामले का अहम सबूत थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 14 गवाह भी पेश किये। साक्ष्यों-गवाहों के आधार पर अपर जिला जज सुभाष सिंह की अदालत ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उनके साथी शिवा गुप्ता को अपहरण और हत्या का दोषी माना है। अब 22 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।

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