प्रेमी की बेरहमी से हत्या…पेट फाड़ा, प्राइवेट पार्ट काट पौधे पर टांगा! प्रेमिका, पति और पिता समेत 4 को आजीवन कारावास

रोहतास जिले की अदालत ने बहुचर्चित मन्नु कुमार हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतक की प्रेमिका सुमन देवी, उसके पति, पिता और भाई को दोषी करार देते हुए सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला मार्च 2019 का है। अभियोजन के मुताबिक, प्रेमिका सुमन देवी ने फोन कर मन्नु कुमार को मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद उसके पति और मायके वालों के साथ मिलकर मन्नु की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया—मन्नु का पेट चाकू से फाड़ा गया और गुप्तांग काटकर सरसों के पौधे पर लटका दिया गया था।

 

रोहतास (बिहार):  रोहतास जिले में प्रेम प्रसंग से जुड़े मन्नु कुमार हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला जज चार अनिल कुमार की अदालत ने मृतक की प्रेमिका सुमन देवी, उसके पति, पिता और भाई को दोषी करार देते हुए सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही चारों दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

यह सनसनीखेज मामला मार्च 2019 का है, जिसने भगवानपुर गांव समेत पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। अभियोजन के अनुसार, प्रेमिका सुमन देवी ने ही फोन कर मन्नु कुमार को मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद उसके पति और मायके वालों के साथ मिलकर मन्नु की नृशंस हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव के साथ अमानवीय बर्बरता की गई—मन्नु का पेट चाकू से फाड़ दिया गया और उसके गुप्तांग को काटकर एक सरसों के पौधे पर लटका दिया गया था।

मामले में सामने आया कि वारदात से दो दिन पहले सुमन देवी अपने पति प्रभाकर सिंह के साथ प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से मायके भगवानपुर आई थी। 4 मार्च 2019 की शाम को मन्नु घर से निकला, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आया। अगले दिन 5 मार्च को उसका क्षत-विक्षत शव सरसों के खेत से बरामद हुआ। मृतक के पिता अशोक चौधरी की शिकायत पर अगरेर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।

अदालत में सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने कुल 9 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने यह साबित किया कि हत्या प्रेम त्रिकोण और तथाकथित पारिवारिक सम्मान के नाम पर रची गई सुनियोजित साजिश थी। बचाव पक्ष की दलीलें साक्ष्यों के सामने टिक नहीं सकीं।

अदालत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष जताया है। न्यायालय ने अपने निर्णय के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जघन्य अपराधों के प्रति कानून का रुख बेहद सख्त है और ऐसे मामलों में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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