नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है। युद्ध की आहट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग गई है। पिछले कुछ ही दिनों में क्रूड की कीमतों में 20 फीसदी का जोरदार उछाल आया है। रक्षा विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) लंबे समय के लिए बंद होता है, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय जहाज, आपूर्ति ठप होने का डर
दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर गुजरता है। भारत और चीन जैसे एशियाई देशों के लिए यह मार्ग जीवनरेखा के समान है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, तनाव के कारण इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। चौंकाने वाली खबर यह है कि भारत के 38 जहाज भी इस क्षेत्र में फंसे या रोके गए हैं। अगर यह सप्लाई चेन टूटी, तो पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा हो जाएगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल में लगी आग के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के महंगे होने की चर्चाएं तेज थीं। हालांकि, आम आदमी के लिए एक राहत भरी खबर भी है। शनिवार, 7 मार्च को आई रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने के पक्ष में नहीं है। लेकिन, यह तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के लिए बुरी खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदकर घरेलू बाजार में सस्ता बेचने से इनके मुनाफे (Margin) पर भारी दबाव पड़ेगा, जिसका असर शेयर बाजार में भी दिख रहा है।
इन 5 प्रमुख इंडस्ट्रीज की बढ़ने वाली है ‘टेंशन’
महंगे तेल का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपकी जेब पर कई तरह से मार पड़ेगी:
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ऑयल मार्केटिंग कंपनियां: लागत बढ़ने से IOC और HPCL के शेयरों में 7 से 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
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एविएशन सेक्टर (IndiGo, SpiceJet): विमान ईंधन (ATF) की लागत बढ़ने से हवाई सफर महंगा हो सकता है। इंडिगो के शेयर युद्ध शुरू होने के बाद से 8.5% गिर चुके हैं।
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पेंट और केमिकल: पेंट बनाने में क्रूड ऑयल के डेरिवेटिव्स का उपयोग होता है। Asian Paints और Berger Paints जैसी कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी।
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टायर और ऑटो: रबर और प्लास्टिक कंपोनेंट्स महंगे होने से वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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फर्टिलाइजर: खेती-किसानी पर भी इसका असर दिखेगा क्योंकि खाद बनाने वाली कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी।
गुजरात के मोरबी में दिखने लगा असर
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का खामियाजा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भुगतना शुरू कर दिया है। गुजरात के मोरबी में प्रसिद्ध टाइल्स इंडस्ट्री ने गैस और एनर्जी की ऊंची कीमतों के कारण उत्पादन को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। यह इस बात का संकेत है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में कई फैक्ट्रियों में ताले लग सकते हैं।
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