सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके

क्या सोशल मीडिया बदल रहा है बच्चों का दिमाग? एक्सपर्ट्स ने बताया 16 साल से पहले क्यों जरूरी है दूरी

– यू-ट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील इन्फ्लूएंसर्स की भरमार
– अश्लीलता की सुनामी की जद में देश का भविष्य, ठोस नीति की जरूरत

लखनऊ। यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म देश में खुलेआम जहर परोसने का माध्यम बन रहे हैं, जी हां इन तमाम सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर कई इन्फ्लूएंसर्स अश्लील कंटेंट परोस रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी घातक साबित हो रहा है, और हैरानी की बात ये है कि सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो और बच्चा चरित्रवान बने। लेकिन फेसबुक, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम द्वारा परोसा हुआ अश्लील जहर आपके बच्चे के भविष्य को बर्बादी की ओर ले जा रहा है।

अश्लील कंटेंट और रील्स की लत बच्चों की एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य, चरित्र निर्माण और शैक्षणिक भविष्य को बिगाड़ रहा है, और यह मामला केवल अभिभावकों की चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और नीति-निर्माताओं के लिए भी गंभीर विषय बन चुका है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, एल्गोरिदम आधारित आकर्षण और अश्लील कंटेंट बच्चों को साइबर बुलिंग, दुरुपयोग और असामाजिक प्रभावों की ओर धकेल रही है। इससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

ताज्जुब की बात तो ये है कि अश्लील कंटेट परोसने वाले इन्फ्लूएंसर्स को फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म प्रमोट भी करते हैं, इन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का एल्गोरिदम इस तरह से तैयार किया जाता है कि बच्चे इस जाल में फंसे रहते हैं, और तब तक फंसे रहते हैं जब तक वे एडिक्ट नहीं हो जाते। जो भारत अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है, उस भारत के भविष्य को इन सोशल मीडिया प्लैटफार्म के द्वारा बड़ी शातिराना ढंग से बर्बाद किया जा रहा है। ‘पब्लिक-डीसेन्सी’ बनाए रखने के लिए कानून तो बनाए गए हैं जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता फैलाना अपराध बताया गया है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि सोशल मीडिया के अश्लील इन्फ्लूएंसर्स पर आखिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।

क्या बोले एक्सपर्ट-
डॉ. प्रसाद कन्नेकांति, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, केजीएमयू

 ‘यह बहुत गंभीर विषय है, अश्लील कंटेंट बच्चे के लिए काफी घातक साबित होता है। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम में बच्चे फंस जाते हैं और स्क्रीन टाइम भी बढ़ जाता है। अश्लील कंटेंट बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बच्चा समाज से कटकर अकेला रहना पसंद करने लगता है, एकाग्रता की कमी होने लगती है, पढ़ाई में मन नहीं लगता है, स्लीप डिसआर्डर की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हैरानी की बात तो ये है कि बच्चा ऐसे इन्फ्लूएंसर्स के प्रभावित होकर खुद भी ऐसे कंटेंट बना सकता है क्योंकि ऐसे कंटेंट को ज्यादा लाइक्स मिलते हैं और फोलोवर्स भी बढ़ जाते हैं। सरकार को इस ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है’। 

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