
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली से सटे मुरादाबाद और बरेली तक फैले एक बड़े साइबर क्राइम सिंडिकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह फर्जी और म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में लोगों से ठगी कर रकम को कई परतों में घुमाकर आखिरकार क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था। इस मामले में पुलिस ने करीबन 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही जांच में करीब 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। इस जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह का कामकाज बेहद संगठित और तकनीकी तरीके से किया जा रहा था। सबसे पहले गिरोह के सदस्य गरीब और जरूरतमंद लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल सिर्फ ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था, जैसे ही किसी पीड़ित से पैसा खातों में आ जाता था, तो तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि असली ठगों तक सीधा सुराग न पहुंचे। बता दें कि पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों के मोबाइल फोन में व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए चाइना आधारित ऑपरेटर्स से लगातार संपर्क रहता था।
इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के जरिए बैंक खातों की इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड और ओटीपी तक साझा किए जाते थे, इसके लिए आरोपी मोबाइल में (एपीके) फाइल इंस्टॉल कराते थे, जो एसएमएस फॉरवर्डर की तरह काम करती थीं। इससे खाते पर आने वाला ओटीपी सीधे विदेश बैठे ऑपरेटर्स तक पहुंच जाता था, जिससे वे खाते पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते थे, जिसके बाद रकम को अलग-अलग क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए (यूएसडीटी) में बदल दिया जाता था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि बायनेंस, मेटामास्क, बिटगेट और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस ठगी से मिलने वाला कमीशन भी आरोपियों को क्रिप्टोकरेंसी के रूप में ही दिया जाता था। इस दौरान जांच में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए चाइना आधारित ऑपरेटर्स के संपर्क में थे। पूर्वी जिला पुलिस के मुताबिक, गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी लिंक की तलाश जारी है।
डीसीपी अभिषेक धनिया ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी में फैला हुआ था। गिरफ्तार आरोपियों में शालीमार गार्डन गाजियाबाद निवासी 25 वर्षीय वसीम शामिल है, जिसके नाम पर चार म्यूल बैंक खाते पाए गए हैं।
साथ ही वसीम पुरानी सीमापुरी इलाके में जैकेट सिलाई का काम करता था। इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को आगे बढ़ाता था। इसके अलावा, गाजियाबाद के शालीमार गार्डन निवासी (29) वर्षीय तोसीन मलिक को भी गिरफ्तार किया गया, जो गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। कई फर्जी खातों को ऑपरेट करता था। दिल्ली के सीमापुरी इलाके से (36) वर्षीय साबिर को धर दबोच लिया गया है, जो पेशे से प्रॉपर्टी ब्रोकर है। साथ ही व्हाट्सऐप के जरिए बैंक खाते और क्रिप्टो लेनदेन से जुड़े संपर्क उपलब्ध कराता था। इसी बीच उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के सैय्यद बड़ा इलाके से (24) वर्षीय फरकान (उर्फ) डॉ शिनू को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो मेडिकल स्टोर चलाता था और ठगी की रकम को (यूएसडीटी) में बदलने का काम करता था। उसके करीबी सहयोगी (25) वर्षीय साहिबे आलम को मुरादाबाद के जयंतिपुर इलाके से दबोचा गया है, जो क्रिप्टो ट्रांजेक्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस ने रामपुर जिले के मिलक थाना क्षेत्र के नगला उदई गांव से (30) वर्षीय मोहम्मद जावेद को भी गिरफ्तार किया है, जो एमआर का काम करता था और व्हाट्सऐप व टेलीग्राम के जरिए बैंक खातों की जानकारी साझा करता था।
सबसे अहम गिरफ्तारी बरेली के पुराने शहर स्थित एजाज नगर इलाके से (35) वर्षीय मोहम्मद रज़ा कादरी की हुई, जो इस नेटवर्क का बड़ा अकाउंट डिस्ट्रीब्यूटर था। उसके कब्जे से कई मोबाइल फोन और दर्जनों बैंक खातों की जानकारी मिली है। इसके अलावा, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके से (24) वर्षीय नूर मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया, जो फल विक्रेता है, जो अलग-अलग राज्यों के म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था।
डीसीपी धनिया ने बताया कि पूर्वी जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक ट्रांजेक्शन के गहन विश्लेषण के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खोली हैं। अब तक 85 म्यूल बैंक खातों का पता लगाया जा चुका है, जिनसे जुड़े 600 से ज्यादा एनसीआरपी शिकायतें देशभर से सामने आई हैं। आरोपियों के पास से 14 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड, 7 डेबिट कार्ड और 4 लाख 70 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।















