नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। हालांकि अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की उम्मीद है, लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन राज्यों में विपक्षी समीकरणों को चुनौती देने के लिए बिसात बिछा दी है, जिससे क्रॉस वोटिंग और जोड़-तोड़ की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
ओडिशा: दिलीप राय की एंट्री से बीजेडी-कांग्रेस खेमे में हलचल
ओडिशा की 4 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में भाजपा ने खेल को त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा ने अपने दो प्रत्याशियों (मनमोहन सामल और सुजीत कुमार) के साथ-साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को निर्दलीय के रूप में उतारकर बीजू जनता दल (बीजेडी) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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गणित: जीत के लिए 30 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। भाजपा के पास 79 विधायक हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे।
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चौथी सीट का पेंच: शेष 22 वोटों के साथ दिलीप राय को जीत के लिए 8 और वोटों की दरकार है। वहीं, बीजेडी ने कांग्रेस के समर्थन से डॉ. दत्तेश्वर होता को उतारा है। यदि बीजेडी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, तो दिलीप राय 2002 की तरह फिर से इतिहास दोहरा सकते हैं।
बिहार: नीतीश कुमार का राज्यसभा दांव और कुशवाहा बनाम अमरेंद्र धारी
बिहार की 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नामांकन को लेकर है, जो करीब 20 साल बाद राज्य की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति (संसद) का रुख कर रहे हैं।
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मुख्य लड़ाई: एनडीए के चार उम्मीदवार (नीतीश कुमार, नितिन नवीन, शिवेश कुमार और रामनाथ ठाकुर) सुरक्षित दिख रहे हैं। असली मुकाबला एनडीए समर्थित उपेंद्र कुशवाहा और राजद के अमरेंद्र धारी सिंह के बीच है।
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निर्णायक भूमिका: जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। एनडीए को अपनी पांचवीं सीट निकालने के लिए 3 और वोटों की जरूरत है, जबकि राजद को 6 वोटों की। ऐसे में बसपा और ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के विधायकों के वोट ‘किंगमेकर’ साबित हो सकते हैं।
हरियाणा: कांग्रेस की राह में ‘निर्दलीय’ रोड़ा
हरियाणा की 2 सीटों के लिए भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध मैदान में हैं, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के नामांकन ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी है।
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क्रॉस वोटिंग का डर: कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और जीत के लिए 31 वोट चाहिए। हालांकि आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में हैं, लेकिन पूर्व में अजय माकन की हार और क्रॉस वोटिंग का इतिहास देखते हुए पार्टी हाईकमान सतर्क है। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार नांदल कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 16 मार्च को होने वाला मतदान न केवल राज्यसभा के समीकरण बदलेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता की मजबूती का भी इम्तिहान लेगा।















