भाजपा से टिकट लेने के लिए लगी कतार, कुंवर राहुल सिंह दौड में दमदार

भास्कर समाचार सेवा

हल्दौर :शासन द्वारा नगर निकाय अध्यक्षों के आरक्षण की सूची घोषित होने के बाद नगर पालिका चुनाव प्रचार की सरगर्मी तेज हो गई है । सभी उम्मीदवारों ने मतदाताओं की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है ।अपनी अपनी नीतियों को जनता के बीच पहुंचाने का काम करना शुरू कर दिया है।
नगर पालिका चुनाव 2022 के संभावित उम्मीदवारों ने शासन द्वारा आरक्षण सूची घोषित होने के बाद अपने अपने चुनाव प्रचार में तेजी ला दी है। हल्दौर नगर पालिका परिषद में लगभग साढे सत्रह हजार मतदाता है । जिसमे से सबसे ज्यादा संख्या चौहान, ठाकुर बिरादरी के है । उसके बाद सैनी व हरिजन लगभग बराबरी की संख्या में है ।इसके अलावा प्रजापति,वैश्य बनिया, ब्राह्मण,कश्यप धीवर, विश्वकर्मा, खटीक पाल समाज व अन्य के मतदाता भी थोड़ी-थोड़ी संख्या में है । नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए सबसे ज्यादा उम्मीदवार भाजपा से टिकट लेने की जुगत में है । जिसमे सबसे प्रबल उम्मीदवार हल्दौर रिहासत के युवराज कुंवर राहुल सिंह एडवोकेट माने जा रहे है।इनके अलावा संजीव बैंस , हंसराज राजपूत , अभिषेक मोनू, दर्पण रावल भी भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे है। पूरा नगर पोस्टर, फ्लेक्स, हॉर्डिंगो से पटा हुआ है।चुनावी माहौल बड़ा दिलचस्प बना हुआ है । समाजवादी पार्टी से भी ठाकुर योगेंद्र सिंह व गौरव कुमार गोल्डी भी टिकट की दावेदारी कर रहे है। अनीस अंसारी ठेकेदार भी चुनावी मैदान में है। सभी उम्मीदवार मतदाताओं से संपर्क कर अपनी अपनी नीतियों से रिझाने का भरकस प्रयास कर रहे है । भाजपा समर्थित मतदाता भी चुप्पी साधे बैठा है। उनका कहना है कि पार्टी जिस भी प्रत्याशी को टिकट देगी वह उसका ही चुनाव में समर्थन करेंगे। अभी तो सभी उम्मीदवार अपना अपना टिकट पक्का मान कर तैयारी में जुटे हैं । अब टिकट किसको मिलता है ये तो अभी गर्भ की बात है। कुंवर राहुल सिंह के समर्थको का मानना है कि वह जनप्रिय छवि व शिक्षित होने के साथ साथ राजनीतिक परिवार से है। उनके परिवार से उनके दादा जी कुंवर हरिराज सिंह दो बार व ताऊजी कुंवर प्रमोद कुमार सिंह एक बार चैयरमैन रह चुके है । जनता उनके कार्यकाल की साफ सुथरी ,निष्पक्ष व ईमानदारी की मिशाल देती है । जनता का कहना है कि इस परिवार से कोई पालिका चैयरमैन बनता है तो शासन से जनता व नगर के विकास के लिए आया पूरा का पूरा पैसा विकास पर ही खर्च होगा। उस धन की बंदर बाट नही होगी।

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