आम आदमी को आरबीआई दे सकती है राहत, बैठक में रेपो रेट पर होगा फैसला

5 दिसंबर को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसला सुनाएंगे

नई दिल्ली, । भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक बुधवार से शुरू हो गई है और ये बैठक 5 दिसंबर चलेगी। छह सदस्यों वाली इस समिति की अध्यक्षता नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं। इस बैठक में रेपो रेट, बाजार में पैसे की स्थिति आने वाले समय में महंगाई का अनुमान और देश की आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य पर फैसला लेंगे और इसके बारे में 5 दिसंबर को आरबीआई गवर्नर फैसला सुनाएंगे। अगर इस बार रेपो रेट कम होता है तो इससे आम आदमी की जेब पर बोझ घट जाएगा।

अक्टूबर वाली एमपीसी बैठक में आरबीआई की समिति ने रेपो रेट को 5.5फीसदी पर ही रखने का फैसला किया था यानी कोई बदलाव नहीं हुआ था। गवर्नर ने कहा कि महंगाई काफी कम हो गई है, इसलिए समिति को भरोसा है कि रेट अभी ऐसे ही रखना सही रहेगा। मतलब अक्टूबर में लोन की ईएमआई और कर्ज की किस्तों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

पिछली बैठक में आरबीआई ने इस वित्त वर्ष के लिए महंगाई का लक्ष्य अनुमान घटाकर सिर्फ 2.6फीसदी कर दिया था, जो पहले 3.1फीसदी था यानी महंगाई पहले के हिसाब से काफी कम रहने वाली है। अगस्त की बैठक में भी अनुमान 3.7 फीसदी से घटाकर 3.1फीसदी किया गया था। मतलब लगातार महंगाई के आंकड़े नीचे आ रहे हैं, जिससे आम आदमी को चीजों के दाम बढ़ने की कम चिंता होगी और ब्याज दरें भी जल्दी कम होने की उम्मीद है।

एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर की आरबीआई मौद्रिक नीति बैठक पर सबसे बड़ा असर महंगाई के बहुत तेज़ी से नीचे आने का है। घरेलू हालात अभी भी मजबूत हैं, लेकिन अमेरिका ने भारत के सामान पर 50फीसदी तक टैरिफ लगा रखा है और ट्रेड डील पर अभी भी बात चल रही है, ये बड़ी चिंता की बात है यानी अंदर से सब ठीक दिख रहा है, लेकिन बाहर का दबाव रेपो रेट घटाने के फैसले को प्रभावित कर सकता है।

आरबीआई दिसंबर वाली मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट कम कर सकता है। अभी रेपो रेट 5.5 फीसदी है, अगर इतनी कटौती हुई तो ये सीधे 5.25 फीसदी पर आ जाएगा। मतलब बैंक से लिया कर्ज और घर-गाड़ी की ईएमआई थोड़ी सस्ती हो सकती है और आम लोगों के लिए अच्छी खबर हो सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों में अभी कोई बदलाव नहीं करेगा क्योंकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार फिर से तेज़ हो गई है। सरकार ने खर्चे कम किए हैं, सही जगहों पर पैसा लगाया है और जीएसटी की दरें भी घटाई हैं, इन सबकी वजह से ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। इसलिए कई लोग कह रहे हैं कि अभी रेपो रेट घटाने की जल्दबाजी होगी, थोड़ा इंतज़ार करना बेहतर है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च टीम की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जब जीडीपी बहुत तेज़ बढ़ रही है और महंगाई लगभग खत्म सी हो गई है, तो अब आरबीआई की ज़िम्मेदारी है कि होने वाली एमपीसी बैठक में साफ-साफ बता दें कि आगे ब्याज दरों का रास्ता क्या होगा, साथ ही अभी भी न्यूट्रल स्टांस रुख बनाए रखना चाहिए।

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