
लखनऊ : केजीएमयू की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्मांतरण के दबाव के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस ने सोमवार को आरोपी डॉ. रमीज के माता-पिता को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि रमीज, बलरामपुर निवासी धर्मांतरण गिरोह के कथित सरगना छांगुर से प्रभावित था। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद से ही रमीज तनाव में था। पुलिस अब रमीज और छांगुर के आपसी संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, रमीज की मुलाकात एक मौलवी के जरिए छांगुर से हुई थी। आरोप है कि इसी मौलवी ने पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया था। चौक पुलिस ने छांगुर से जुड़े पहलुओं को देखते हुए खुफिया एजेंसियों को भी मामले की जानकारी दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बीते एक साल में रमीज कहां-कहां गया और किन लोगों से उसके संपर्क रहे। आरोपी की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि रमीज की विदेश में कुछ लोगों से बातचीत हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद वह देश छोड़कर फरार हो गया है। हालांकि, उसकी अंतिम लोकेशन लखनऊ में ही मिली थी, लेकिन इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया, जिससे आगे की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है।
सूत्रों का दावा है कि रमीज ने साजिश के तहत पहली पीड़िता का धर्मांतरण कराया था। इस मामले में पुलिस ने उसके पिता सलीमुद्दीन (निवासी खटीमा, उधमसिंह नगर, उत्तराखंड) और मां खदीजा को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस पीलीभीत निवासी काजी सैय्यद जाहिद हसन की तलाश में जुटी है, जिसने कथित तौर पर निकाह कराया था। माना जा रहा है कि काजी की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह के राज खुल सकते हैं और यह भी सामने आ सकता है कि उसने अब तक कितनी महिलाओं का धर्मांतरण कराया है। इसके अलावा, धर्मांतरण के गवाह बताए जा रहे शारिक खान की तलाश में भी पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है।

आरोपी की अब तक गिरफ्तारी न होने पर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में नहीं लिया गया था। उस समय रमीज केजीएमयू में मौजूद था, लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही, जिसके बाद वह मौका पाकर भूमिगत हो गया। इस लापरवाही को लेकर कई संगठनों ने नाराजगी जताई है।
इस मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉ. रमीज मलिक केजीएमयू की 15 अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह अलग-अलग धर्म की महिला रेजिडेंट्स से लगातार बातचीत करता था। केजीएमयू में चर्चा है कि रेजिडेंट डॉक्टर का धर्मांतरण कराने पर मोटी रकम मिलती थी। बताया जा रहा है कि दिल्ली निवासी एक डॉक्टर के धर्मांतरण के बदले रमीज को करीब 15 लाख रुपये मिले थे, जबकि नॉन-मेडिको के धर्मांतरण पर लगभग पांच लाख रुपये दिए जाते थे। इसी कारण वह एक साथ कई रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। कॉल डिटेल्स में सामान्य कार्य समय के बाद भी लंबी बातचीत के साक्ष्य मिले हैं, जिससे पूरे मामले को एक संगठित साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।










