तख्तापलट के बाद शेख हसीना की पहली हुंकार…’बोरिया-बिस्तर बांध लो, अब वतन वापसी का वक्त है’, ढाका में मची खलबली

नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद महीनों से भारत में शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। लंबे समय की खामोशी को तोड़ते हुए हसीना ने दिल्ली से अपनी पार्टी ‘आवामी लीग’ के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जो तेवर दिखाए, उसने पड़ोसी देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। हसीना ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “बोरिया-बिस्तर बांध लो, अब घर लौटने और मैदान में उतरने का वक्त आ गया है।”

अंतरिम सरकार को बताया अवैध, चुनाव को कहा ‘मजाक’

दिल्ली में हुई इस उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक में शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की वैधता पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने आवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि जो सरकार खुद गैर-कानूनी तरीके से सत्ता में आई है, उसके पास किसी पार्टी को बैन करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। हसीना ने हालिया चुनाव प्रक्रिया को ‘लोकतंत्र का मजाक’ बताते हुए दावा किया कि 60 प्रतिशत मतदान के आंकड़े पूरी तरह फर्जी हैं और जनता ने इस चुनावी ढोंग का बहिष्कार किया है।

“मानसिक और शारीरिक संघर्ष के लिए रहें तैयार”

आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने भावुक लेकिन कड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ चल रहे दमनकारी चक्र को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे एकजुट होकर सड़कों पर उतरें और लोकतंत्र की बहाली के लिए अंतिम संघर्ष को तैयार रहें। शेख हसीना ने चेतावनी दी कि यदि उनकी पार्टी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश जारी रही, तो आवामी लीग अपनी रणनीति खुद तय करेगी और सख्त कदम उठाएगी।

ढाका से दिल्ली तक कूटनीतिक हलचल तेज

शेख हसीना के इस ‘रिटर्न प्लान’ ने ढाका की अंतरिम सरकार और विपक्षी दलों की रातों की नींद उड़ा दी है। जहां एक ओर आवामी लीग के समर्थकों में इस बयान से नई ऊर्जा का संचार हुआ है, वहीं उनके विरोधियों और तारिक रहमान के नेतृत्व वाली व्यवस्था को डर है कि हसीना की वापसी से देश में फिर से हिंसा और अस्थिरता का दौर शुरू हो सकता है। बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना पर पहले ही कई गंभीर मुकदमे दर्ज कर रखे हैं, जिसके चलते उनकी वापसी के साथ ही बड़े कानूनी और राजनीतिक टकराव की संभावना जताई जा रही है।

क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ेगा असर?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना का यह आक्रामक रुख भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों के लिए भी एक नई चुनौती पेश कर सकता है। दिल्ली में रहते हुए हसीना की यह सक्रियता ढाका के वर्तमान प्रशासन को नागवार गुजर रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेख हसीना अपनी वापसी की तारीख कब घोषित करती हैं और इस एलान के बाद बांग्लादेश की सड़कों पर किस तरह का जनसैलाब या विरोध देखने को मिलता है। 

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