Silver Price Alert: चांदी खरीदने से पहले ठहरिए, नहीं तो फंस सकता है आपका पैसा

चांदी की कीमतों में हाल ही में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को दुविधा में डाल दिया है. कई लोग इसे सस्ते में खरीदारी का मौका मान रहे हैं, लेकिन बाजार के संकेत कुछ और कहानी कह रहे हैं. जिस तेजी से दाम ऊपर गए थे, उसी रफ्तार से नीचे फिसलना यह बताता है कि उतार-चढ़ाव अभी खत्म नहीं हुआ है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है. इतिहास गवाह है कि चांदी में बड़ी गिरावट के बाद कीमतों को संभलने में लंबा समय लग सकता है. इसलिए निवेश से पहले बाजार के संकेतों और जोखिम को समझना बेहद जरूरी है. 

कितने गिरे दाम?

कुछ दिन पहले तक चांदी आसमान छू रही थी, लेकिन शुक्रवार को भाव धड़ाम से गिरकर लगभग ₹2.92 लाख प्रति किलो पर आ गया और एक ही दिन में करीब ₹1.08 लाख सस्ता हो गया. इतनी तेज बिकवाली हुई कि बाजार में लोअर सर्किट लग गए, इसे बीते कई सालों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट माना जा रहा है. इतनी तेज गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में पहले जरूरत से ज्यादा उत्साह था, जो अब ठंडा पड़ रहा है.

क्यों ज्यादा जोखिम में है चांदी?

जानकारों के अनुसार चांदी की कीमतें अक्सर तब तेजी से बढ़ती हैं, जब बाजार में सट्टेबाजी का माहौल होता है. दाम अगर बहुत तेज़ी से ऊपर जाएं, तो बाद में उतनी ही तेजी से गिरने की आशंका भी रहती है. इसलिए चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती है. 

क्या और कम होंगे चांदी के दाम?

रिपोर्ट्स के अनुसार चांदी के दाम कम हो सकते हैं. सोने और चांदी की कीमतों का अनुपात सामान्य से काफी नीचे आ गया है. इतिहास बताता है कि जब भी ऐसा हुआ है, चांदी ने बाद में सोने की तुलना में ज्यादा गिरावट दिखाई है. इसका मतलब है कि चांदी अभी भी दबाव में रह सकती है. अतीत में जब चांदी और सोने में बड़ी गिरावट आई, तो पुराने स्तर पर लौटने में कई साल लग गए. इससे साफ है कि गिरावट के बाद तेजी से रिकवरी की उम्मीद करना सही नहीं होता. 

सोना-चांदी बनाम इक्विटी

सोना और चांदी धन की सुरक्षा के लिए तो ठीक माने जाते हैं, लेकिन ये आपको कोई नियमित कमाई नहीं देते है. इसके मुकाबले, मजबूत कंपनियों के शेयरों में लगाया गया पैसा समय के साथ बेहतर बढ़ोतरी दे सकता है. शेयर बाजार में टैक्स का फायदा भी मिलता है और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना आसान रहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कुल निवेश का केवल छोटा हिस्सा ही सोना-चांदी में रखना चाहिए. हाल की तेजी के चलते कई लोगों के निवेश में इन धातुओं का भाग जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है. 

क्या चांदी में इंवेस्ट करना चाहिए?

अगर हाल की तेजी में आपको लाभ मिला है, तो उसका थोड़ा हिस्सा निकाल लेना समझदारी भरा कदम हो सकता है. निवेश का संतुलन बनाए रखने के लिए बची रकम को अलग-अलग ऑप्शन में लगाना बेहतर रहता है. चांदी की ताजा गिरावट यह बताती है कि बाजार अभी शांत नहीं हुआ है.इसलिए बिना सोचे-समझे खरीदारी करने के बजाय हालात को परखना और धैर्य रखना ज्यादा ठीक है.

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