बंगाल में ‘बुआ-भतीजा’ मॉडल बनाम BJP का चक्रव्यूह: ममता ने उत्तर तो अभिषेक ने दक्षिण में संभाली कमान, क्या ढहेगा भगवा किला?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासी बिसात पर शह और मात का खेल अब अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। आगामी चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जहाँ ममता बनर्जी ने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं, वहीं भाजपा ने भी समय से पहले नाम घोषित कर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। इस बार टीएमसी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है—ममता बनर्जी खुद उस ‘उत्तर बंगाल’ की कमान संभाल रही हैं, जिसे भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। वहीं, दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी उनके उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के कंधों पर है।

उत्तर बंगाल में ममता की हुंकार: अलीपुरद्वार से किया शंखनाद

उत्तर बंगाल, जहाँ 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में भगवा लहर का दबदबा रहा था, वहां इस बार ममता बनर्जी ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री ने अलीपुरद्वार से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। टीएमसी की रणनीति साफ है—दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, फुलबारी और नक्सलबाड़ी जैसे क्षेत्रों में रैलियों और सघन बैठकों के जरिए भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाना। ममता यहां खुद ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरकर यह संदेश देना चाहती हैं कि उत्तर बंगाल अब उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।

दक्षिण का दुर्ग बचाएंगे अभिषेक: सांगठनिक मजबूती पर फोकस

एक तरफ जहाँ बुआ (ममता) उत्तर में पसीना बहा रही हैं, वहीं भतीजे (अभिषेक बनर्जी) को दक्षिण बंगाल की कमान सौंपी गई है। दक्षिण बंगाल टीएमसी का पारंपरिक गढ़ रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में भाजपा ने यहाँ भी अपनी पैठ बढ़ाई है। अभिषेक का पूरा ध्यान जिलों में संगठन को फिर से जीवित करने, गुटबाजी खत्म करने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है। “बुआ-भतीजा” की यह जोड़ी राज्य के दोनों कोनों को एक साथ साधने की कोशिश कर रही है ताकि सत्ता की हैट्रिक सुनिश्चित की जा सके।

BJP की ‘त्रिमूर्ति’ ने कसी कमर: बूथ स्तर तक घेराबंदी की तैयारी

सत्ताधारी दल की इस चुनौती का जवाब देने के लिए भाजपा ने भी अपने भारी-भरकम रणनीतिकारों को मैदान में उतार दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेता बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। सिलीगुड़ी से लेकर दुर्गापुर तक बैठकों का दौर जारी है। भाजपा की रणनीति इस बार केवल बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र के साथ घर-घर संपर्क अभियान और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों (लाभार्थी वर्ग) को जोड़ने पर टिकी है।

उत्तर बनाम दक्षिण: क्या सफल होगा टीएमसी का नया मॉडल?

बंगाल का यह चुनाव अब ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ की रणनीतिक जंग में तब्दील हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता का उत्तर बंगाल पर केंद्रित होना भाजपा के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। वहीं भाजपा का कैडर आधारित ढांचा और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता टीएमसी के लिए बड़ी बाधा है। अब देखना यह होगा कि “बुआ-भतीजा” का यह दो-तरफा हमला भाजपा के अभेद्य नजर आने वाले ढांचे को कितना नुकसान पहुँचा पाता है और बंगाल की जनता किसे सत्ता की चाबी सौंपती है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment