
नई दिल्ली । चिकित्सकीय विज्ञान और आयुर्वेद दोनों इस बात पर सहमत हैं कि सर्दियों में कानों को ढककर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि शरीर में ठंड का असर सबसे तेजी से कानों के जरिए ही पड़ता है। कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा होते हैं। इनमें न तो पर्याप्त मांसपेशियां होती हैं और न ही वसा की परत, जो ठंडी हवा से सुरक्षा दे सके। कान की त्वचा के नीचे तंत्रिकाओं का जाल फैला होता है, जिस पर जब सर्द हवा सीधे टकराती है, तो शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है और व्यक्ति सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर समस्याओं तक का शिकार हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, कानों का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है। ठंडी हवा कानों के माध्यम से दिमाग की नसों को प्रभावित करती है, जिससे सिरदर्द, भारीपन और माइग्रेन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में चक्कर आना या बेहोशी तक की नौबत आ सकती है। कानों के पीछे मौजूद फेशियल नर्व चेहरे में रक्त संचार को नियंत्रित करती है।
यदि इस हिस्से पर तेज ठंडी हवा लगातार लगती रहे, तो नसों में सूजन आ सकती है, जिससे अस्थायी चेहरे का लकवा, जबड़े का जाम होना या चेहरे का एक हिस्सा सुन्न पड़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक, कानों का संबंध वात दोष से जुड़ा होता है और वात का असंतुलन सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। सर्दियों में कान खुले रखने से वात दोष बढ़ सकता है, जिससे पेट में गैस, मरोड़, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों को इस मौसम में खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए तो यह लापरवाही और भी खतरनाक हो सकती है। ठंडी हवा नसों को संकुचित करती है, जिससे रक्त वाहिनियों पर दबाव बढ़ता है। इससे हाई बीपी या लो बीपी की समस्या अचानक बिगड़ सकती है, जो दिल और दिमाग दोनों के लिए जोखिम भरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में बाहर निकलते समय कानों को टोपी, मफलर या ईयर कवर से ढककर रखना चाहिए। रात में सोने से पहले हल्के गुनगुने तेल से कानों के पीछे की त्वचा पर मालिश करने से तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है। बता दें कि सर्दियों का मौसम आते ही लोग गर्म कपड़ों, स्वेटर और जैकेट से खुद को तो ढक लेते हैं, लेकिन अक्सर सिर और कानों को खुला छोड़ देते हैं। खासतौर पर युवा वर्ग टोपी या मफलर पहनने को फैशन के खिलाफ मानता है, जबकि यही लापरवाही सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।















