मंदिर के लिये चंदा न देना दलित को पड़ा भारी, सरपंच ने की ये बदसलूकी

ओडिशा में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। केंद्रपाड़ा जिले के तिखीरी गांव के एक 32 वर्षीय दलित व्यक्ति को कथित तौर पर मंदिर में देवता की स्थापना के लिए दान देने से इंकार करने के बाद एक गांव के सरपंच और स्थानीय लोगों के सामने अपने ही थूक में अपनी नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया गया। बेरोजगार युवक ने गांव के सरपंच के खिलाफ पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है।

सरपंच ने खरीखोटी सुनाई

तिखीरी गांव में रहने वाले सरपंच चमेली ओझा मंदिर के लिए चंदा मांगने के लिए दलित व्यक्ति, जिसका नाम गुरुचरण मलिक है, के घर गए थे। पुलिस ने बताया कि मलिक ने सरपंच से कहा कि वह पहले ही मंदिर के लिए चंदा दे चुका है। युवक ने कहा कि वह कोई पैसा नहीं दे पाएगा क्योंकि उसने पहले ही मूर्ति के लिए दान कर दिया था। इस पर सरपंच ने खरीखोटी सुनाई।

आरोप- सरपंच ने दलित और उसकी पत्नी रेखा को अपशब्द कहे

इस पर युवक और सरपंच के साथ आए ग्रामीणों के बीच बहस छिड़ गई। आरोप है कि सरपंच ने दलित और उसकी पत्नी रेखा को अपशब्द कहे। पुलिस में FIR दर्ज कराने वाली मलिक की पत्नी रेखा ने अपनी शिकायत में कहा है कि शनिवार को हुई इस घटना के बाद रविवार को गांव में पंचायत बुलाई गई। जिसमें सरपंच ने शुरुआती तौर पर गुरुचरण मलिक के परिवार का बहिष्कार करने को कहा।

थूक में अपनी नाक रगड़ने लिए मजबूर किया

इसके बाद वहां उसे अपने थूक में अपनी नाक रगड़ने लिए मजबूर किया गया। कोई विकल्प नहीं बचा तो युवक ने मान लिया क्योंकि यह ग्राम समिति का आदेश था। वहीं सरपंच ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरपंच ने कहा कि दलित दंपत्ति झूठ बोल रहा है, गांव में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

मरसघई पुलिस थाना क्षेत्र के थाने के इंस्पेक्टर इनचार्ज पीके कानूनगो ने बताया कि सरपंच और कुछ ग्रामीणों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि हमने लगभग 60 ग्रामीणों के बयान दर्ज किए हैं। आगे की जांच चल रही है, उसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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