सवालों के कठघरे में संस्थान, छठवीं मंजिल से कूदा पीएचडी छात्र….22 दिन के अंदर दो छात्रों ने मौत को गले लगाया


होनहारों की कब्रगाह आईआईटी-कानपुर में एक और सुसाइड

  • एंजाइटी से पीड़ित था पीएचडी छात्र स्वरूप ईश्वराम
  • परिसर में परिवार संग रहता था राजस्थान का छात्र
  • 29 दिसंबर को हॉस्टल में जयसिंह ने किया था सुसाइड

कानपुर। आईआईटी-कानपुर के इतिहास में एक और धब्बा। तमाम कामयाबी और अविष्कारों के कारण देश-विदेश में मशहूर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल तकनीकी संस्थान में एक और होनहार अपनी जिंदगी को हार गया। मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले का निवासी छात्र स्वरूप ईश्वराम (25) आईआईटी से पीएचडी कर रहा था। उसने तनाव से परेशान होकर मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे छठवीं मंजिल से छलांग लगाने का आत्मघाती कदम उठाकर चौंका दिया। आनन-फानन में उसे आईआईटी की एंबुलेंस से निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर शाम इलाज के दौरान मौत गई है। आईआईटी ने बीते दो साल से होनहारों के सुसाइड का ग्राफ तेजी के साथ बढ़ा है। 22 दिन पहले 29 दिसंबर को कैंपस के हॉस्टल में बीटेक फाइनल ईयर के छात्र जयसिंह मीणा ने भी बैक-पेपर के कारण अच्छी नौकरी नहीं मिलने के तनाव में फांसी लगाकर जिंदगी का साथ छोड़ा था।

कूदते देख पत्नी दौड़ी, लेकिन बचा नहीं पाई
मूलरूप से राजस्थान के चुरू जिले में विद्यासर के गिरिवरसर के रहने वाले राम प्रताप ईश्वराम का 25 वर्षीय पुत्र स्वरूप ईश्वराम कानपुर आईआईटी से डिपार्टमेंट आफ अर्थ साइंस से पीएचडी कर रहा था। खबर है कि, स्वरूप काफी समय से तनाव में था, इसी कारण वह एंजाइटी से ग्रसित था। इसी कारण उसकी देखभाल के लिए पत्नी मंजू आईआईटी परिसर के न्यू एसबीआरए बिल्डिंग के कमरा नंबर एए-21 में उसके साथ रहती थी। मंजू ने बताया कि, स्वरूप का तकनीकी संस्थान के चिकित्सालय में काफी दिन से इलाज चल रहा था। मंगलवार दोपहर स्वरूप अपने कमरे से बाहर निकला और कुछ देर बिल्डिंग में इधर-उधर टहलने के बाद अचानक छठवीं मंजिल से नीचे कूद गया। पत्नी उसे पकड़ने भी दौड़ी थी, लेकिन बचा नहीं पाई। मंजू की सूचना पर आईआईटी प्रशासन ने आनन-फानन में स्वरूप को गुरुदेव चौराहा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार ने बताया कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, शव को पोस्टमार्टम भेजा दिया गया है।

दो साल में नौवीं मौत ने उठाए सवाल
आईआईटी-कानपुर में दो साल की अवधि में आत्महत्या की नौ घटनाओं ने संस्थान की काउंसिलिंल को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मंगलवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद से संस्थान प्रशासन भी सकते में है। आईआईटी-कानपुर में दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच तीन होनहारों ने सुसाइड किया था, जिसके बाद आईआईटी प्रशासन ने छात्रों का ओपन हाउस मंच भी आयोजित किया था। आईआईटी के काउंसिलिंग सेंटर में मनोविज्ञानियों की संख्या भी बढ़ाकर 10 की गई है, इसके बावजूद आत्महत्या की घटनाएं नहीं थमीं। गौरतलब है कि, 22 दिन पहले 29 दिसंबर 2025 को आत्महत्या करने वाले जयसिंह मीणा ने वर्ष 2020 में बीटेक के बायोलाजिकल सांइसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में प्रवेश लिया था। चार साल का बीटेक कोर्स 2024 में पूरा होना चाहिए था। बैकपेपर की वजह से उसे अधिक समय लगा और 2025 की वार्षिक परीक्षा में भी वह सभी प्रश्नपत्र में उत्तीर्ण नहीं हुआ था। दिसंबर में शुरू हुए प्लेसमेंट की प्रक्रिया में भी अधूरी डिग्री के कारण शामिल नहीं हो सका था। इसी तनाव में परिजनों से रविवार को बात करने के बाद सोमवार की सुबह उसने फांसी लगाकर जिंदगी का अंत कर लिया था।

आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या का इतिहास
19 दिसंबर 2023 : शोध सहायक स्टाफ डा. पल्लवी चिल्का
10 जनवरी 2024 : एमटेक छात्र विकास मीणा
18 जनवरी 2024 : पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल
10 अक्टूबर 2024 : पीएचडी छात्रा प्रगति
10 फरवरी 2025 : पीएचडी रिसर्च स्कालर अंकित यादव
25 अगस्त 2025 : साफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी
01 अक्टूबर 2025 : बीटेक अंतिम वर्ष का छात्र धीरज सैनी
29 दिसंबर 2025 : बीटेक अंतिम वर्ष छात्र जयसिंह मीणा
20 जनवरी 2026: पीएचड़ी कर रहे छात्र स्वरूप ईश्वराम

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