यमन मसले ने बढ़ाई खटास : सऊदी अरब और यूएई में गहराए मतभेद…जानें पूरा मामला

गल्फ । खाड़ी देश सऊदी अरब और यूएई दोनों एक दूसरे के दुश्मन बनते दिख रहे हैं। यमन के मसले पर इन दोनों देशों में तनातनी चल रही है। मंगलवार को सऊदी अरब ने यमन में यूएई से जुड़े हथियारों की खेप पर हवाई हमला कर दिया। यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी की आर्मी ने बमबारी की। हालात इस कदर हो गए हैं कि यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने यूएई की सेना को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।

इसके बाद यूएई ने भी अपनी सेना को वापस बुला लिया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि वह यमन से अपनी बची सैन्य मौजूदगी को भी खत्म कर देगा। यूएई जब से अस्तित्व में आया, तभी से सऊदी अरब उसका समर्थक रहा है। बता दें कि ये दोनों ही देश सुन्नी मुस्लिम बहुल और राजशाही व्यवस्था वाले हैं और दोनों की अर्थव्यस्था तेल पर निर्भर है। खाड़ी में ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर उपजी चिंता के कारण दोनों देशों की दोस्ती काफी मजबूत रही है। 2010 के दशक की शुरुआत में दोनों देशों की दोस्ती चरम पर थी। सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के शासक मोहम्मद बिन जायद (एमबीजेड) इस्लामी कट्टरवाद और ईरान के खिलाफ मिलकर एकजुट रहे। 2011 में संयुक्त अरब अमीरात और यूएई ने इस्लामी आंदोलनों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाया।

बहरीन में विद्रोह को दबाने के लिए संयुक्त सेना भेजी और 2013 में मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड सरकार को सेना द्वारा हटाने में अहम भूमिंका निभाई।30 दिसंबर 2025 को यमन के दक्षिणी बंदरगाह मुकल्ला पर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हवाई हमला किया। सऊदी अरब का दावा है कि उन्होंने एक डॉक को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल यूएई समर्थित अलगाववादियों को विदेशी सैन्य सहायता पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। सऊदी ने स्पष्ट कहा कि ये हमला यूएई से जुड़े एक हथियारों की खेप पर किया गया था। यूएई ने सऊदी अरब के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जिस खेप पर हमला किया गया, उसमें कोई हथियार नहीं थे, बल्कि वह यूएई की सेना के लिए रसद और सामान था।दोनों ही देश अब तेल की इकॉनमी से आगे बढ़ना चाहते हैं।

यूएई का विजन 2021 (2008 से) पहले शुरू हुआ। उसने अपने शहर दुबई को ग्लोबल हब बनाया। सऊदी का विजन 2030 अब यूएई को चुनौती दे रहा है। सऊदी की नियोम सिटी, रियाद एयर, जेद्दाह पोर्ट अब ग्लोबल हब बनने को है। साल 2021 से सऊदी ने यूएई फ्री जोन्स से इंपोर्ट पर प्रतिबंध लगाए हैं। मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन जायद में गल्फ देशों का नेता बनने की होड़ मची है। बता दें कि यूएई यमन में दक्षिणी अलगाववादियों को सपोर्ट करता है और सऊदी सरकार को।

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