सचिन तेंदुलकर का ये सीक्रेट जान आप भी हो जायेंगे इस क्रिकेटर के दिवाने  

सचिन तेंदुलकर साल 2013 में इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं. उन्होंने आखिरी मैच नवंबर 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था. सचिन तेंदुलकर को पूरी दुनिया में फॉलो किया जाता है. ये भारत के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें भारत रत्न का सम्मान भी मिला है। इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले इस भारतीय बल्लेबाज ने कुछ वक्त पहले जाने माने एंकर को एक पर्सनली गाइडेड टूर की पेशकश की जिसमें सचिन ने उन्हें उन ठिकानों के बारे में और अपनी लाइफ से जुड़े उन हिस्सों के बारे में खुलकर बताया जिन्होंने उनके टीम इंडिया के लिए खेलने के रास्ते पर गहरा प्रभाव डाला। सचिन तेंदुलकर ने बताया कि आखिर क्यों उन्हें इतनी कम उम्र में परिपक्व होना पड़ा, वो दो फोन लेकर क्यों घूमते हैं और हर मैच से पहले वो एक विशेष मंदिर में क्यों जाते थे।

मेरा लक्ष्य रहा टीम इंडिया के लिए खेलना

एक इंटरव्यू में सचिन तेंदुलकर ने बताया कि एक मंदिर में जाते हैं और कहते हैं, ‘मैं इस टैप से पानी पीता था जो इस मंदिर के बाहर है। मेरे अंदर एक फीलिंग थी एक विश्वास था कि ये पानी मुझे ऊर्जा देता है। इस पानी में कोई ताकत छिपी है जो मुझे मेरे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मेरी मदद कर रहा है। उस वक्त मेरा लक्ष्य टीम इंडिया के लिए खेलना था।

पानी पीने के समय करता था प्रार्थना

सचिन तेंदुलकर ने अपना सीक्रेट बताते हुए कहा, ‘मैं जब-जब यहां पर इस पानी को पीने के लिए आता था तब-तब मंदिर में भगवान की ओर देखकर प्रार्थना करता था। मैं अपने करियर के दौरान लगातार इस चीज को करता रहा था। 2013 में अपने करियर का आखिरी मैच खेलने से पहले भी मैंने यही धार्मिक क्रिया निभाई थी जो मैं निभाता आ रहा था।

सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘कभी-कभी सुबह के 4 बजे या 3 बजे भी मैं यहां आ जाता था जब वहां कोई नहीं होता था। मैं तब जाकर इस धार्मिक क्रिया को करता था। मैं हर दौरे पर जाने से पहले जरूर ऐसा करता था।

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