ट्रंप की वो 5 बड़ी गलतियां, जिन्होंने ‘अजेय’ अमेरिका को ईरान के चक्रव्यूह में फंसा दिया….जानिए कहाँ हो गईं चूक

वाशिंगटन/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए हालात ‘एकला चलो रे’ जैसे हो गए हैं। जिस जीत का सपना लेकर ट्रंप ने युद्ध का बिगुल फूंका था, 15 दिनों के भीतर वह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। अरब मुल्कों की बेरुखी और यूरोपीय सहयोगियों के इनकार ने व्हाइट हाउस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि शीर्ष नेतृत्व खोने के बावजूद ईरान झुकने के बजाय और अधिक आक्रामक नजर आ रहा है।

सहयोगियों की ‘ना’ और ट्रंप की मायूसी

जंग की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा था कि उनके एक इशारे पर नाटो देश और खाड़ी के मित्र राष्ट्र ईरान को चारों तरफ से घेर लेंगे। हालांकि, हकीकत इसके उलट निकली। सऊदी अरब समेत तमाम खाड़ी देशों ने इस युद्ध में अमेरिका का सैन्य साझीदार बनने से साफ मना कर दिया है। वहीं, यूरोप और नाटो देशों ने भी ईरान के खिलाफ मोर्चे पर उतरने से हाथ खींच लिए हैं। कूटनीतिक जानकारों की मानें तो ट्रंप इस अलगाव से बेहद निराश हैं और उन्हें अब अपनी रणनीतिक गलतियों का भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

खामेनेई और कमांडरों की मौत के बाद भी ईरान का पलटवार

युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका को बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली थी। हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और 40 से अधिक टॉप सैन्य कमांडर मारे गए। ईरान के आधे से ज्यादा युद्धपोत समुद्र में दफन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की कमर नहीं टूटी है। मुज्तबा खामेनेई के नए सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है।

खुफिया रिपोर्ट को दरकिनार करना पड़ा भारी

वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईए (CIA) ने युद्ध से पहले ट्रंप को दो महत्वपूर्ण चेतावनियां दी थीं। पहली रिपोर्ट में स्पष्ट था कि केवल हवाई हमलों से ईरान में तख्तापलट मुमकिन नहीं है। दूसरी रिपोर्ट ने आगाह किया था कि बाहरी हमले से ईरान का शासन और अधिक मजबूत हो सकता है और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड’ फिर से सक्रिय हो सकती है। ट्रंप ने इन दोनों ही रिपोर्ट्स को नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

अरब जगत की नाराजगी और बयानों ने बिगाड़ा खेल

ट्रंप ने इस पूरे अभियान में अपने सबसे करीबी अरब सहयोगियों जैसे कतर और यूएई को विश्वास में नहीं लिया। ओमान ने तो यहां तक कहा कि प्रस्तावित शांति वार्ता से महज दो दिन पहले हमला करना अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक चूक थी। रही सही कसर ट्रंप के विवादित बयानों ने पूरी कर दी। युद्ध के बीच “सैनिकों को मजा आ रहा है” जैसे बयानों ने न केवल अमेरिका की किरकिरी कराई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

रणनीतिक उलझन और बाजार में हाहाकार

वर्तमान में राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध विराम को लेकर भी असमंजस में दिख रहे हैं। कभी वे शांति की बात करते हैं, तो अगले ही दिन जंग जारी रखने की हुंकार भरते हैं। इस अस्थिरता की वजह से दुनिया के शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं। अब स्थिति यह है कि ईरान में जमीनी सेना उतारना ट्रंप के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है और पीछे हटना उनकी प्रतिष्ठा के खिलाफ। ऐसे में सवाल यही है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप इस चक्रव्यूह से बाहर निकल पाएंगे?

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