ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी: ‘बातचीत करो या अंजाम भुगतो’, अमेरिकी नौसेना को होर्मुज की नाकेबंदी का आदेश

वॉशिंगटन (ब्यूरो)। अमेरिका और ईरान के बीच सुलगता तनाव अब बारूद के ढेर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अड़ियल रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए साफ कर दिया है कि उन्हें अब तेहरान की परवाह नहीं है। पाकिस्तान में हुई हालिया शांति वार्ता के विफल होने के बाद ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी नौसेना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी करने का फरमान सुना दिया है।

‘मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता’—एंड्रयूज बेस पर गरजे ट्रंप

मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दोटूक अंदाज में कहा, “मुझे इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं है कि वे (ईरान) बातचीत की मेज पर लौटते हैं या नहीं। अगर वे नहीं आते, तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है।” ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वादा किया था कि वह होर्मुज जलमार्ग को खुला रखेगा, लेकिन उसने अपनी बात से पलटकर पूरी दुनिया को आर्थिक संकट और पीड़ा में डाल दिया है।

ईरानी नौसेना पर ट्रंप का तंज: ‘पूरी तरह तबाह हो चुकी है फोर्स’

ईरान के उन दावों को ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया जिसमें समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने की बात कही गई थी। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि हकीकत यह है कि ईरान की नौसेना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और वह केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रही है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना को सख्त निर्देश दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उन सभी जहाजों को रोका जाए जिन्होंने ईरान को ‘अवैध शुल्क’ का भुगतान किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध वसूली को बढ़ावा देने वालों को समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा।

परमाणु जिद बनी शांति में रोड़ा, IRGC ने दी ‘घातक भंवर’ की धमकी

तनाव की मुख्य वजह ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं बनी हुई हैं। ट्रंप ने दोहराया कि जब तक तेहरान परमाणु हथियारों की जिद नहीं छोड़ता, शांति संभव नहीं है। दूसरी ओर, ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) ने भी तीखे तेवर दिखाए हैं। IRGC ने पलटवार करते हुए कहा है कि होर्मुज पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और अमेरिका की कोई भी सैन्य हिमाकत उसे एक ऐसे ‘घातक भंवर’ में फंसा देगी जिससे निकलना नामुमकिन होगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट: क्या बढ़ेगी तेल की कीमतें?

मौजूदा हालात में ट्रंप के पास अब तीन ही विकल्प बचे हैं—कूटनीति का अंतिम प्रयास, सीधी सैन्य कार्रवाई या होर्मुज की पूर्ण नाकेबंदी। विशेषज्ञ चिंतित हैं क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि ट्रंप नाकेबंदी के फैसले पर अडिग रहते हैं, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फिलहाल ट्रंप ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति पर चल रहे हैं, उन्हें उम्मीद है कि भारी दबाव ईरान को उनकी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर कर देगा।

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