ट्रंप का ‘टैरिफ धमाका’! सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद अमेरिका ने लगाया 10% ग्लोबल टैक्स, जानिए भारत के लिए ‘राहत’ या ‘मुसीबत’?

 

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार जगत में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगने के कुछ ही घंटों बाद एक नया दांव चल दिया। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका आने वाले आयातित सामानों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया है। यह नया आदेश 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। खास बात यह है कि इस नई व्यवस्था की वजह से भारत के लिए स्थिति दिलचस्प हो गई है, जहां कुछ सामानों पर टैक्स का बोझ कम होता दिख रहा है, वहीं वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और ट्रंप की नाराजगी

यह पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक 6-3 के बहुमत वाले फैसले में राष्ट्रपति ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को ‘अवैध’ घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 1977 के IEEPA कानून के तहत राष्ट्रपति के पास व्यापक आयात शुल्क लगाने की शक्ति नहीं है, यह अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन द्वारा वसूले गए अरबों डॉलर के शुल्क अमान्य हो गए हैं और अब अमेरिकी सरकार को लगभग 130 से 175 अरब डॉलर तक का रिफंड देना पड़ सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को ‘भयानक’ और ‘हास्यास्पद’ बताते हुए कहा कि अदालत विदेशी हितों से प्रभावित है।

सेक्शन 122: ट्रंप का नया ‘हथियार’

सुप्रीम कोर्ट से हार मिलने के बाद ट्रंप ने हार नहीं मानी। उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करते हुए 10 फीसदी वैश्विक अधिभार (Surcharge) लगाने की घोषणा की। यह कानून राष्ट्रपति को ‘बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स’ (व्यापार घाटे) को सुधारने के लिए 150 दिनों तक अस्थायी रूप से 15% तक शुल्क लगाने की अनुमति देता है।

भारत के लिए ‘राहत’ या ‘मुसीबत’?

भारत के नजरिए से यह खबर मिली-जुली है। हाल ही में भारत-अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय सामानों पर 18% पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाने की बात चल रही थी। लेकिन अब वैश्विक टैरिफ 10% होने से भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सकती है क्योंकि अब उन्हें 18% के बजाय 10% का ही भुगतान करना होगा। हालांकि, यह राहत अस्थाई है और ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से जुड़े अन्य टैरिफ (जैसे स्टील और एल्युमीनियम पर) जारी रहेंगे।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

भले ही दर कम हुई हो, लेकिन 10% का ग्लोबल टैक्स भारतीय स्टील, एल्युमीनियम, ऑटो पार्ट्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों के लिए एक नई चुनौती है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत को भी इस नई व्यवस्था का हिस्सा बनना होगा और सभी व्यापारिक साझेदारों को अमेरिकी समझौतों का पालन करना होगा। 

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