UNSC की रिपोर्ट ने खोली पाक के झूठ की पोल: लाल किला हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ, यूएन ने माना- मसूद अजहर का संगठन अभी भी सक्रिय

न्यूयॉर्क: वैश्विक मंच पर आतंकवाद को लेकर दोहरा खेल खेलने वाले पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में करारी शिकस्त मिली है। यूएन की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान के उन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिनमें वह जैश-ए-मोहम्मद को ‘निष्क्रिय’ बताता रहा है। रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है कि दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए भीषण आतंकी हमले के तार सीधे तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। भारत के लिए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

जैश की नई साजिश: मसूद अजहर ने तैयार की ‘महिला आतंकी विंग’

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर न केवल स्वतंत्र रूप से घूम रहा है, बल्कि वह अपने आतंकी नेटवर्क का विस्तार भी कर रहा है। मसूद अजहर ने पिछले साल 8 अक्टूबर को ‘जमात-उल-मुमिनात’ नामक एक समर्पित महिला विंग बनाने की घोषणा की थी। इस शाखा का मुख्य उद्देश्य भविष्य के आतंकी हमलों के लिए रसद, खुफिया जानकारी और समर्थन जुटाना है। यह खुलासा पाकिस्तान के उस सफेद झूठ को बेनकाब करता है कि उसने जैश की कमर तोड़ दी है।

लाल किला हमले का सच: पाकिस्तान का विरोध पड़ा कमजोर

समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 9 नवंबर को लाल किले पर हुए आत्मघाती हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का ही हाथ था, जिसमें 15 मासूमों ने अपनी जान गंवाई थी। चर्चा के दौरान पाकिस्तान ने बेशर्मी से इन तथ्यों का विरोध किया और जैश को एक ‘खत्म हो चुका’ संगठन बताया। हालांकि, दुनिया के अन्य शक्तिशाली देशों ने भारत द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों पर भरोसा जताया। नतीजतन, पाकिस्तान के कड़े विरोध के बावजूद रिपोर्ट में जैश और उसके अपराधों का विवरण बरकरार रखा गया।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी पर चीन-पाक की चाल नाकाम

पाकिस्तान को दूसरा बड़ा झटका बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के मुद्दे पर लगा। पाकिस्तान और चीन की जुगलबंदी बीएलए को अल-कायदा जैसे खूंखार समूहों से जोड़कर उसे वैश्विक आतंकी सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रही थी। उनका मकसद बलूच विद्रोह को कुचलना और CPEC प्रोजेक्ट्स पर हो रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने साफ कर दिया कि बीएलए और अल-कायदा के बीच कोई लिंक नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव पर ‘टेक्निकल होल्ड’ लगा दिया है।

चीन को मिला करारा जवाब: उसी के दांव से हुआ शिकार

दिलचस्प बात यह है कि चीन अक्सर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के आतंकियों को बचाने के लिए ‘तकनीकी होल्ड’ का इस्तेमाल करता रहा है। इस बार पश्चिमी देशों ने उसी के पैंतरे का इस्तेमाल कर पाकिस्तान और चीन के दोहरे मापदंडों को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। यूएन की यह रिपोर्ट साबित करती है कि अब आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को वैश्विक स्तर पर मान्यता और समर्थन मिल रहा है, जबकि पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है। 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

13 − 10 =
Powered by MathCaptcha