यूपी पुलिस परीक्षा में ‘पंडित’ विकल्प पर बवाल: डिप्टी सीएम का कड़ा रुख, जांच के आदेश के बाद अधिकारियों में हड़कंप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के एक विवादास्पद प्रश्न ने प्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। दरोगा भर्ती परीक्षा के हिंदी प्रश्न पत्र में ‘अवसरवादी’ शब्द के विकल्प के तौर पर ‘पंडित’ शब्द का उपयोग किए जाने पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इसे सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।

एक सवाल और चार विकल्प: आखिर कहां से शुरू हुआ विवाद?

भर्ती परीक्षा के दौरान हिंदी व्याकरण के खंड में एक प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” वाक्यांश के लिए एक सटीक शब्द चुनें। इसके लिए जो चार विकल्प दिए गए थे, उनमें (A) निष्कपट, (B) सदाचारी, (C) पंडित और (D) अवसरवादी शामिल थे। इस प्रश्न के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग होते ही अभ्यर्थी और विभिन्न सामाजिक संगठन भड़क उठे। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या जानबूझकर किसी वर्ग विशेष की छवि को धूमिल करने और समाज में नकारात्मक संदेश फैलाने के लिए ऐसा किया गया?

डिप्टी सीएम की चेतावनी: दोषियों को किसी कीमत पर नहीं बख्शेंगे

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग कतई स्वीकार्य नहीं है। पाठक ने कहा, “हमारी सरकार सभी समाजों के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए संकल्पित है। किसी भी प्रश्न से यदि समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो यह गंभीर अपराध है।” उन्होंने इस मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों व विशेषज्ञों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

भर्ती बोर्ड के विशेषज्ञों की टीम घेरे में, मंशा पर उठे सवाल

इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता के दावों के बीच, अब उन विशेषज्ञों की टीम की जांच की जा रही है जिन्होंने यह प्रश्न पत्र तैयार किया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील शब्दों का चयन केवल एक मानवीय त्रुटि नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने की गहरी मंशा भी हो सकती है। सरकार अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि आखिर यह शब्द चयन किस स्तर पर और क्यों किया गया।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

+ 23 = 29
Powered by MathCaptcha