उत्तराखंड : मुगलों के जुल्म के खिलाफ गुरु तेग बहादुर ने जगाई थी अलख- पदम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया गुरु तेग बहादुर का 400वां प्रकाश उत्सव, जीवनवृत पर डाला प्रकाश

भास्कर समाचार सेवा

रुड़की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रुड़की द्वारा नवे गुरु तेग बहादुर का 400वां प्रकाश उत्सव नगर निगम हाल रुड़की में सरदार कमलजीत सिंह की अध्यक्षता में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पदम ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने पद प्रतिष्ठा की लालसा से दूर रहकर अपना जीवन बलिदान कर दिया। मुगल शासकों को गुरु परंपरा से भय था, इसलिए मुगल इसे नष्ट करना चाहते थे, किंतु आक्रमणों में विफल होने के कारण उन्होंने षड्यंत्र और अत्याचार का मार्ग अपनाया, जिससे समाज आतंकित हो जाए और सत्ता विरुद्ध आवाज ना उठा सके। गुरु और शिष्यों के इन बलिदानों ने समाज में लोक चेतना, जन जागरण, आत्मविश्वास, साहस, निडरता और जुर्म के खिलाफ खड़ा होने के लिए समाज को एक सूत्र में पिरोया।

उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव के भारत भ्रमण के समय मर्दाना और बाला उनके साथ रहते थे। गुरु परंपरा समाज में सामाजिक समरसता के लिए संगत द्वारा समाज में एक संदेश देती है तथा धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान करने के लिए प्रेरणा देती है। गुरुओं के संदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं और वह स्थान पवित्र है।

कार्यक्रम में विभाग संचालक रामेश्वर, जिला संचालक परवीन, नगर संघचालक जल सिंह, अनुज, राजकुमार, सरदार अमरजीत सिंह, सरदार नरेंद्र सिंह, सरदार सुरेंद्र सिंह, डॉ हरविंदर सिंह, राजेंद्र सिंह खुल्लर, सरदार कुलदीप सिंह, सरदार गुरदीप सिंह, सरदार बलवीर सिंह, सरदार प्रीतपाल सिंह, सरदार कुलवंत सिंह सहित सैकड़ों व्यक्तियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन विवेक कांबोज ने किया।

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