मनाली/केलांग। हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर घूमने आए सैलानियों के लिए मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। पिछले कुछ दिनों से खिली धूप के बाद अब वादियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। मनाली की ऊपरी पहाड़ियों और लाहौल घाटी में शनिवार देर रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रविवार सुबह भारी बर्फबारी में तब्दील हो गया। अटल टनल के साउथ पोर्टल समेत पूरी लाहौल घाटी अब चांदी जैसी चमक रही है।
रोहतांग टॉप से लेकर शिंकुला दर्रे तक बर्फ ही बर्फ
लाहौल-स्पीति जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे कोकसर, जिस्पा, दारचा, शिंकुला और बारालाचा-ला में रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। रोहतांग टॉप पर ताजा बर्फबारी के बाद पूरी घाटी का नजारा बेहद मनमोहक हो गया है। हालांकि, इस बर्फबारी ने घाटी में एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौटा दी है। मनाली और कुल्लू के निचले इलाकों में लगातार हो रही बारिश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोग फिर से गर्म कपड़ों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी: 3 अप्रैल तक नहीं मिलेगी राहत
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक राहत के आसार नहीं हैं। विभाग ने 29 मार्च से 3 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में मौसम खराब रहने का अनुमान जताया है। विशेष रूप से 29 से 31 मार्च और फिर 2-3 अप्रैल को प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है। 1 अप्रैल को भी ऊंचाई वाले इलाकों में हल्के हिमपात की संभावना बनी हुई है।
आंधी और तूफान को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी
मौसम विभाग ने केवल बर्फबारी ही नहीं, बल्कि तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है। 29-30 मार्च और 2-3 अप्रैल को प्रदेश के कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की आशंका है, जिसके लिए बाकायदा ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। सैलानियों को सलाह दी गई है कि वे असुरक्षित पेड़ों या ढांचों के पास न रुकें।
प्रशासन सख्त: सैलानियों की आवाजाही पर पाबंदी
खराब मौसम और सड़कों पर फिसलन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर दोपहिया वाहनों को सोलंग बैरियर से आगे जाने की अनुमति पूरी तरह बंद कर दी गई है। केवल 4×4 (फोर बाय फोर) वाहनों को ही बेहद जरूरी स्थिति में आगे जाने दिया जा रहा है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी ठोस कारण के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर रुख न करें और यात्रा के दौरान मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।















