
नई दिल्ली: भागदौड़ भरी जिंदगी और स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ‘नींद’ अब एक लग्जरी बनती जा रही है। अगर आप भी रात भर छत निहारते रहते हैं या हर दो घंटे में आपकी नींद टूट जाती है, तो इसे हल्के में न लें। यह केवल थकान नहीं, बल्कि इंसोम्निया (Insomnia) या अनिद्रा की बीमारी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की कमी न केवल आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन लाती है, बल्कि यह आपके दिल, दिमाग और इम्यून सिस्टम पर भी हमला करती है।
क्या है इंसोम्निया और यह कब खतरनाक हो जाता है?
मेयो क्लिनिक (Mayoclinic) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना 7 से 9 घंटे की गहरी नींद की जरूरत होती है। तनाव या किसी दुखद घटना के कारण कुछ दिनों के लिए नींद न आना सामान्य है। लेकिन, असली खतरा तब शुरू होता है जब यह समस्या 3 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहे। इसे चिकित्सा की भाषा में ‘क्रॉनिक इंसोम्निया’ कहा जाता है, जो शरीर के आंतरिक अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाने लगता है।
इन 5 कारणों से उड़ सकती है आपकी रातों की नींद
इंसोम्निया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का संकेत भी हो सकता है:
- मानसिक स्वास्थ्य: एंग्जायटी (चिंता) और डिप्रेशन (अवसाद) नींद के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
- शारीरिक बीमारियां: अस्थमा, थायरॉयड, जोड़ों का पुराना दर्द और एसिडिटी रात में चैन से सोने नहीं देते।
- स्लीप डिसऑर्डर: ‘स्लीप एपनिया’ (सोते समय सांस रुकना) या ‘रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम’ (पैरों में बेचैनी) नींद में खलल डालते हैं।
- दवाइयों का असर: बीपी, अवसाद या अस्थमा की कुछ दवाइयां आपके स्लीप पैटर्न को बिगाड़ सकती हैं।
- बदलता लाइफस्टाइल: गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल और शिफ्ट वाली नौकरियां आपके सर्कैडियन रिदम (शरीर की प्राकृतिक घड़ी) को पूरी तरह ध्वस्त कर देती हैं।
अलार्म बेल: कब बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं?
यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो समझ लें कि अब घरेलू नुस्खों से काम नहीं चलेगा और आपको डॉक्टर (स्लीप स्पेशलिस्ट) की जरूरत है:
- दिनभर थकान: सुबह उठने के बाद भी ऐसा लगना कि आप सोए ही नहीं।
- व्यवहार में बदलाव: अत्यधिक चिड़चिड़ापन, उदासी, घबराहट या काम में बार-बार गलतियां करना।
- एकाग्रता की कमी: किसी भी काम में ध्यान न लगना और छोटी-छोटी बातों पर चिंता करना।
- सुरक्षा का खतरा: ड्राइविंग या काम के दौरान अचानक झपकी आना।
विशेषज्ञों की सलाह: डॉक्टर आपकी स्थिति को समझने के लिए ‘स्लीप टेस्ट’ की सलाह दे सकते हैं। इससे यह पता चलता है कि नींद न आने की असली जड़ शारीरिक है या मनोवैज्ञानिक।
नींद को बेहतर बनाने के कुछ क्विक टिप्स
- स्लीप शेड्यूल: सोने और जागने का एक ही समय तय करें।
- डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप को खुद से दूर कर दें।
- कैफीन से दूरी: शाम के बाद चाय या कॉफी का सेवन न करें।
- आरामदायक माहौल: बेडरूम में अंधेरा और शांति रखें।













