सीएम कौन रहेगा 5 साल? मंत्रिमंडल विस्तार बनाम ढाई-ढाई फॉर्मूला, कर्नाटक कांग्रेस में घमासान

नई दिल्ली( । कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चला आ रहा नेतृत्व विवाद 2026 की शुरुआत में भी पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 15 जनवरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करने की संभावना है। इस प्रस्तावित बैठक को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सिद्धारमैया मंत्रिमंडल विस्तार के प्रस्ताव पर आलाकमान की मुहर चाहते हैं ताकि वो ही पांच साल सीएम रहेंगे इसकी मैसेजिंग साफ हो जाए जबकि उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस बात पर अड़े हैं कि ढाई ढाई साल सीएम के कथित फार्मूले पर आलाकमान पहले अंतिम फैसला करे। विदित हो सिद्धारमैया के बतौर मुख्यमंत्री ढाई साल पूरा होने के बाद से ही उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली पर लगातार दबाव बनाया हुआ है इससे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में सबकुछ ठीक चल रहा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में होने वाली बातचीत में मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा हो सकती है, वहीं नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा भी उठने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक किसी औपचारिक एजेंडे की घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में बदलाव के पक्ष में हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार चाहते हैं कि पहले पार्टी नेतृत्व के सवाल पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। इसी मतभेद ने पार्टी के भीतर बहस को और तेज कर दिया है। बीते कुछ महीनों में जो चर्चा केवल अंदरूनी बैठकों तक सीमित थी, वह अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखने लगी है। राज्य के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर नेतृत्व पर स्पष्टता की मांग की है। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए और उन्हें मजबूत संगठनकर्ता तथा जमीनी नेता बताया। पार्टी के अंदर यह धारणा भी मजबूत हो रही है कि डीके शिवकुमार को संगठन और कैडर के बीच व्यापक समर्थन प्राप्त है। वहीं, कई वरिष्ठ नेताओं ने यह भी कहा है कि वे केंद्रीय नेतृत्व के किसी भी फैसले का समर्थन करेंगे और अंतिम निर्णय हाईकमान का ही होगा।

सार्वजनिक तौर पर सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। दोनों नेताओं ने कहा है कि पार्टी जो भी फैसला करेगी, वे उसे स्वीकार करेंगे। संयुक्त कार्यक्रमों और बैठकों के जरिए स्थिरता का संदेश देने की कोशिश भी की जा रही है।इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे पर बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा, लेकिन मध्य जनवरी से पहले किसी बड़े फैसले की संभावना कम बताई जा रही है। हाल ही में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी कुछ नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उठाया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली आगामी बैठकें बेहद अहम होंगी। यदि केंद्रीय नेतृत्व स्पष्ट दिशा देता है तो कर्नाटक कांग्रेस फिर से शासन और विकास के एजेंडे पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी, जो पार्टी की 2026 की व्यापक राजनीतिक रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, कर्नाटक कांग्रेस में दोनों खेमे हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं और पूरे राज्य की निगाहें दिल्ली पर टिकी हुई है।

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