अयोध्या। रामनगरी अयोध्या से इस वक्त की बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भव्य और दिव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे (कैश) में करोड़ों की हेराफेरी और चोरी के मामले में पुलिस और प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी जांच टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी नामजद आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस महकमा बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। सच को सामने लाने के लिए पुलिस की कई टीमें हर एक पहलू को बेहद गहराई से खंगाल रही हैं, जिससे इस महापाप से जुड़े हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके।
टिन्नू यादव से लेकर अनुकल्प मिश्रा के घरों पर Raid, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई तलाशी
जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए रविवार को अयोध्या के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले आरोपियों के घरों पर एक साथ धावा बोल दिया। पुलिस की विशेष टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के पैतृक और वर्तमान ठिकानों पर पहुंचीं। स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने इन सभी ठिकानों पर पूरी बारीकी से तलाशी अभियान चलाया। घर के एक-एक कोने, अलमारियों और लॉकरों को खंगाला गया, ताकि इस बड़े सिंडिकेट और चोरी से जुड़े अहम डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाए जा सकें।
परिजनों से तीखे सवाल, प्रतापगढ़ के अविनाश शुक्ला का पुराना कमरा भी सील
छापेमारी के दौरान पुलिस की टीमों ने आरोपियों के परिजनों और उनके पड़ोसियों को भी रडार पर लिया। मजिस्ट्रेट की देखरेख में परिजनों से घंटों तीखे सवाल-जवाब किए गए और पड़ोसियों से इन आरोपियों की हालिया गतिविधियों के बारे में गोपनीय फीडबैक लिया गया। जांच के दौरान पुलिस टीम अयोध्या में आरोपी अविनाश शुक्ला के किराये के मकान पर भी पहुंची। पता चला है कि अविनाश मूल रूप से प्रतापगढ़ का रहने वाला है और उसने कुछ महीने पहले ही यह कमरा खाली कर दिया था। पुलिस ने मकान मालिक, पड़ोसियों और नीचे दुकान चलाने वाले दुकानदार के बयान दर्ज किए हैं, ताकि यह पता चल सके कि कमरा खाली करने से पहले वहां कौन-कौन आता-जाता था।
पैसों की गिनती करने वाले निकले ‘आस्तीन के सांप’, अब तक ₹79.85 लाख कैश बरामद
इस सनसनीखेज कांड के बारे में जो सबसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, वो यह है कि गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर ट्रस्ट के तहत आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम में तैनात थे। जिन हाथों पर रामलला के खजाने की सुरक्षा और गिनती का जिम्मा था, वही ‘आस्तीन के सांप’ निकले और उन्होंने वहीं से धीरे-धीरे लाखों-करोड़ों रुपयों का हेरफेर कर दिया। पुलिस अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये की भारी-भरकम नगदी बरामद कर चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून (Anti-Corruption Act) जैसी संगीन और गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
कुंडली खंगालने में जुटी SIT, कल कोर्ट से रिमांड मांगेगी पुलिस
यह ताबड़तोड़ कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती और बेहद गोपनीय रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है। जांच टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रही हैं, बल्कि आरोपियों की अवैध कमाई और संपत्तियों का भी पता लगा रही हैं। आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर उनके लेन-देन (ट्रांजैक्शन हिस्ट्री) की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है कि आखिर मंदिर से चुराया गया पैसा कहां-कहां भेजा गया।
बता दें कि कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। पुलिस सोमवार (कल) इन सभी आरोपियों को दोबारा अदालत में पेश करेगी। कड़ियों को जोड़ने, बाकी बचे पैसों की बरामदगी और इस साजिश के पीछे छिपे बड़े मगरमच्छों का पता लगाने के लिए पुलिस कोर्ट से इन सभी की ‘कस्टडी रिमांड’ मांगेगी।













