कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा चुका है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल बंगाल की सत्ता बदली है, बल्कि भारतीय राजनीति के समीकरणों को भी हिला कर रख दिया है। बीजेपी ने बंगाल में ‘डबल सेंचुरी’ जड़ते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है और अब गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर कौन होगा बंगाल का अगला ‘सुल्तान’?
नंदीग्राम के बाद भवानीपुर फतह, क्या शुभेंदु के सिर सजेगा ताज?
मुख्यमंत्री की रेस में इस वक्त सबसे बड़ा और कद्दावर नाम शुभेंदु अधिकारी का है। शुभेंदु ने न केवल अपनी बादशाहत साबित की है, बल्कि ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ भवानीपुर में भी 15 हजार से अधिक वोटों से शिकस्त देकर ‘जायंट किलर’ की छवि को और पुख्ता कर दिया है। मेदिनीपुर की सभी 16 सीटों पर बीजेपी का परचम लहराने का श्रेय भी शुभेंदु को ही जाता है। आरएसएस की शाखाओं से निकले शुभेंदु, जो कभी ममता के ‘दाहिने हाथ’ थे, आज उन्हीं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
अमित शाह का ‘बंगाली सीएम’ कार्ड और दिल्ली में मंथन
चुनाव प्रचार के दौरान ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल में जीत के बाद मुख्यमंत्री कोई ‘बंगाली’ ही होगा। पार्टी ने यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ा और जनता ने उस पर मुहर लगा दी है। अब बारी वादे को निभाने की है। शुभेंदु के पक्ष में उनका जमीनी जनाधार और टीएमसी के किले को ढहाने का अनुभव काम कर रहा है, लेकिन दिल्ली दरबार में कुछ और नामों पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है।
दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य: संगठन के मजबूत स्तंभ
रेस में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी चर्चाओं में है। 2015 से 2021 के बीच बंगाल में बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में उनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। वहीं, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी इस दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। शिक्षित मध्यम वर्ग के बीच लोकप्रिय और आरएसएस के करीबी समिक ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में बड़ी सफलता हासिल की है।
क्या महिला मुख्यमंत्री से चौंकाएगी बीजेपी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी किसी महिला चेहरे को आगे कर बंगाल की महिलाओं (महिला वोट बैंक) को बड़ा संदेश दे सकती है। इस फेहरिस्त में अग्निमित्रा पॉल का नाम सबसे आगे है। फैशन डिजाइनर से राजनेता बनीं अग्निमित्रा अपनी तेजतर्रार छवि के लिए जानी जाती हैं। वहीं, ‘महाभारत’ की ‘द्रौपदी’ यानी रूपा गांगुली के नाम पर भी कयास लगाए जा रहे हैं। रूपा गांगुली की पहचान बंगाल के घर-घर में है और वे राज्यसभा सांसद के रूप में अपना अनुभव साबित कर चुकी हैं।
टीएमसी का सूपड़ा साफ, बीजेपी 200 के पार
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बंगाल की 293 सीटों में से बीजेपी ने 206 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, ममता बनर्जी की टीएमसी पहली बार 100 के आंकड़े से नीचे गिरकर महज 80 सीटों पर सिमट गई है। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। बंगाल की जनता ने परिवर्तन की जिस लहर पर मुहर लगाई है, उसका नेतृत्व अब किसके हाथों में होगा, इसका फैसला अगले कुछ घंटों में होने वाली विधायक दल की बैठक में हो जाएगा।















