
नई दिल्ली/लखनऊ। देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रपति भवन ने शनिवार देर रात एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल (एलजी) नियुक्त किया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार, उनकी यह नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी। 62 वर्षीय दिनेश शर्मा वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने वाला था। राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने से ठीक पहले उन्हें इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी दिए जाने को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अकादमिक बैकग्राउंड से डिप्टी सीएम तक का सफर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबा और बेदाग अनुभव रखने वाले डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर रहे हैं। राजनीति में कदम रखने के बाद वे दो बार लखनऊ के महापौर चुने गए। वर्ष 2008 में पहली बार और 2012 में दूसरी बार उन्होंने मेयर का पद संभाला। इसके बाद संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया और 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वे गुजरात भाजपा के प्रभारी भी रह चुके हैं। वर्ष 2017 से 2022 तक वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली पहली सरकार में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे, जहां उन्होंने माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आईटी जैसे प्रमुख विभागों का सफल संचालन किया। इसके बाद 2023 में वे निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए थे।
यूपी चुनाव 2027 और जातीय समीकरणों का संतुलन
दिनेश शर्मा की इस नई भूमिका को केवल एक प्रशासनिक फेरबदल के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है। दिनेश शर्मा यूपी भाजपा में ब्राह्मण समुदाय का एक प्रमुख और सर्वमान्य चेहरा रहे हैं। पार्टी के इस कदम को पारंपरिक सवर्ण वर्ग को साधे रखने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिसमें बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी एक तरफ ब्राह्मण और सवर्ण समाज में विश्वास मजबूत कर रही है, तो दूसरी तरफ ओबीसी, दलित और अन्य वर्गों को भी संगठन में प्रमुख स्थान देकर 2027 की घेराबंदी में जुट गई है।
संसदीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक दक्षता का मिला इनाम
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल पद प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। डॉ. दिनेश शर्मा के पास शिक्षा, संगठन, राज्य सरकार और संसद—चारों क्षेत्रों का व्यापक अनुभव है। राज्यसभा में भी उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। संसद में उनकी उपस्थिति 94 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें उन्होंने 226 प्रश्न पूछे और 34 महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय रूप से भाग लिया। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने सांगठनिक और सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साध रही है। ऐसे में डॉ. दिनेश शर्मा को मिली यह नई जिम्मेदारी जहां उनके लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव पर मुहर लगाती है, वहीं आगामी चुनावी गणित के लिहाज से भी एक बड़ा संदेश देती है।















