उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की कथित चोरी और गबन के मामले में पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस ने पाया है कि श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से चढ़ाए गए दान की चोरी की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा बकायदा शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश किया गया था। यही नहीं, आरोपियों ने इस पाप की कमाई को बाजार में लोगों को मोटे ब्याज पर उधार भी दे रखा था।
पुलिस द्वारा गुरुवार को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे काले खेल को छिपाने के लिए मुख्य आरोपियों ने अपने सगे-संबंधियों, करीबियों और दोस्तों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। रुपयों की हेराफेरी के लिए इन खातों के जरिए दर्जनों बार संदिग्ध लेन-देन (Transactions) किए गए थे।
आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, सोने के जेवरात और नकदी बरामद
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस और एसआईटी की टीमें आरोपियों को उनके घरों पर ले जाकर लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के सिलसिले में पुलिस आरोपी अनुकल्प मिश्रा को भारी सुरक्षा के बीच अयोध्या स्थित उसके पैतृक आवास पर लेकर पहुंची। वहां करीब 20 मिनट तक घर के कोने-कोने को खंगाला गया और इस दौरान उसके परिवार के सदस्यों से भी गहन पूछताछ की गई।
इससे ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार को पुलिस टीम इस सनसनीखेज मामले के सह-आरोपियों लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को भी उनके घरों पर लेकर गई थी, जहां उनकी मौजूदगी में सघन तलाशी ली गई। तीनों आरोपियों के घरों पर की गई इस छापेमारी में पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। टीमों ने मौके से नकदी (कैश) के बंडल, सोने के झुमके, लॉकेट सहित भारी मात्रा में सोने के आभूषण और एक आलीशान कार जब्त की है।
रिश्तेदारों के 30 बैंक खाते हुए फ्रीज, आय से अधिक मिला लेन-देन
राम मंदिर के चढ़ावे में सेंध लगाने वाले इस गिरोह पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। मामले से जुड़े तीनों मुख्य आरोपियों—करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के रिश्तेदारों व करीबी सहयोगियों के 30 बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (लेन-देन पर रोक) कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती वित्तीय जांच और बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर इन सभी 30 खातों में खाताधारकों की वास्तविक और ज्ञात आय के स्रोतों से कई गुना ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन दर्ज पाया गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक बरामद कुल नकदी के आंकड़ों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है और न ही यह स्पष्ट किया है कि सोने के जेवरात किस आरोपी के घर से बरामद हुए हैं।
ट्रांजेक्शन छिपाने के लिए बुना था खातों का मकड़जाल, शेयर बाजार में लगाया पैसा
पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके सह-आरोपी अविनाश ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कई राज उगले हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि मंदिर के काउंटिंग रूम (दान गणना कक्ष) से गायब किए गए रुपयों को उन्होंने सीधे शेयर बाजार में निवेश कर दिया था ताकि रकम को तेजी से बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, अवैध रूप से भारी रकम बाजार में ब्याज पर भी उठा दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को इस बात के भी पुख्ता सबूत मिले हैं कि चोरी की गई धनराशि को पहले बेहद शातिर तरीके से करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में बांटा गया। बाद में, जब जांच की भनक लगी या लेन-देन के ट्रैक को उलझाना हुआ, तो रकम को वापस मुख्य आरोपियों के खातों में ट्रांसफर (अंतरित) कर लिया गया।
6.7 लाख में खरीदी थी एक एकड़ जमीन, आज कीमत करोड़ों में!
आरोपी अनुकल्प मिश्रा से हुई पूछताछ के बाद जब अयोध्या पुलिस ने उसके घर पर दोबारा छापा मारा, तो वहां से कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रॉपर्टी के दस्तावेज (Property Documents) बरामद हुए। इन दस्तावेजों से पता चला है कि अनुकल्प के नाम पर अयोध्या जैसे वीवीआईपी इलाके में एक एकड़ की कीमती जमीन खरीदी गई थी।
दस्तावेजों के मुताबिक, इस जमीन की ऑन-पेपर रजिस्ट्री करीब 6.7 लाख रुपये में कराई गई थी। हालांकि, राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके मद्देनजर इस एक एकड़ जमीन की मौजूदा बाजार कीमत (Market Value) कई गुना ज्यादा यानी करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जून के पहले हफ्ते में खुला था गबन का राज, 8 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
गौरतलब है कि इस पूरे महाविवाद की शुरुआत जून के पहले सप्ताह में हुई थी, जब अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि की गिनती के दौरान भारी विसंगतियां और अनियमितताएं सामने आईं। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की शिकायत और सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया था।
एसआईटी की प्राथमिक जांच में गबन और धोखाधड़ी के अकाट्य साक्ष्य मिले, जिसके बाद तुरंत मामले में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस इस मामले में मंदिर के दान की गिनती से जुड़े आठ कर्मचारियों और सेवादारों को पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय गबन के इस मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही कुछ और बड़े चेहरों पर कानून का डंडा चल सकता है।













